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Kannauj News: निष्क्रिय खातों में जमा 59.23 करोड़ रुपये वापस कराने की कवायद

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कन्नौज। आपकी पूंजी आपका अधिकार अभियान के तहत निष्क्रिय खातों में जमा 59.23 करोड़ रुपये वापस कराने की प्रक्रिया तेज हो गई है। इसे लेकर शिविर लगाकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। निष्क्रिय धनराशि वापस होने से लाभान्वितों के चेहरे खिल उठे।
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विकास भवन सभागार में शुक्रवार को जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में जिले के विभिन्न बैंकों, बीमा कंपनियों, म्यूचुअल फंड संस्थानों, एनबीएफसी तथा अन्य वित्तीय संस्थानों के अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे। शिविर के जरिए निष्क्रिय पड़े बैंक खाते, बीमा दावे, म्यूचुअल फंड यूनिट्स, पीएफ एवं अन्य वित्तीय परिसंपत्तियों की वास्तविक पहचान कर सही ग्राहकों को उनकी अपनी जमा पूंजी लौटाई जा रही है। मुख्य अतिथि के डीएम आशुतोष मोहन अग्निहोत्री तथा विशिष्ट अतिथि सीडीओ रामकृपाल चौधरी ने संयुक्त रूप से शिविर का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि जिले में संचालित इस अभियान के तहत अब तक 236,794 खातों की कुल राशि 59.23 करोड़ रुपये की धनराशि उनके वैध लाभार्थियों को वापस दिलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
शिविर में अग्रणी जिला प्रबंधक अमरेंद्र कुमार ने बताया कि इस विशेष शिविर में विभिन्न वित्तीय संस्थानों द्वारा लगभग 1,000 निष्क्रिय खातों को पुनर्जीवित करने तथा सात करोड़ रुपये उनके वास्तविक दावेदारों को स्थानांतरित करने की प्रक्रिया की जा रही है, जिससे लाभान्वितों के चेहरे खिल उठे। उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर निष्क्रिय खातों की पहचान की जा रही है और लाभार्थियों को उनकी पूंजी बिना किसी जटिलता के उपलब्ध कराई जा रही है। इसके लिए खाताधारक नागरिक उद्गम पोर्टल से भी अपनी निष्क्रिय पूंजी बैंक बैलेंस, बीमा राशि, म्यूचुअल फंड यूनिट्स, पीएफ, एनपीएस अथवा डाकघर खातों की जानकारी प्राप्त कर ऑनलाइन दावा प्रस्तुत कर सकते हैं। शिविर में डीसीएनआरएलएम राजकुमार लोधी, उपायुक्त उद्योग धनंजय सिंह, मत्स्य अधिकारी अजय सिंह मौजूद रहे।
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फोटो :24: सुरेंद्र सिंह।
भूला हुआ पैसा पाकर लाभान्वितों के चेहरे पर आई खुशी
कैंप के दौरान उमर्दा ब्लाक के ग्राम खरगपुर निवासी सुरेंद्र सिंह ने बताया भारतीय स्टेट बैंक इंडिया में खाता 10 साल पहले खुलवाया था। कहा कि खाते में 22 हजार रुपये पड़े हुए थे, लेकिन उन्हें याद नहीं था कि खाते में पैसा पड़ा हुआ है। कई बार बैंक द्वारा जानकारी दी गई कि अपने बैंक खाते में ईकेवाईसी करवा लें, लेकिन मैंने इस कोई ध्यान नहीं दिया। शुक्रवार को कैंप के दौरान भूले हुए रुपये पाकर उनका चेहरा खिल उठा।
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फोटो :25: विक्रम पांडेय।
सदर ब्लॉक के मोहल्ला होली निवासी सैमिनी पांडे के भाई ने बताया कि बहन ने आठ साल पहले स्कूल की छात्रवृत्ति पाने के लिए इलाहाबाद बैंक में खाता खुलवाया था। कुछ समय बाद वह पढ़ाई करने दूसरे शहर दिल्ली चली गई। इस बाबत उसे बहन को दूसरा खाता खुलवाना पड़ा। इलाहाबाद बैंक खाते में 3870 रुपये पड़ा रहा और बहन व अन्य किसी परिवार के लोगों को इसकी जानकारी नहीं हुई। कैंप के दौरान उसे जानकारी हुई तो भूले हुए पैसे पाकर गदगद हो गया।

फोटो :26: सफीरउद्दीन।
सदर ब्लॉक के गांव फरिकापुर निवासी सफीरउद्दीन ने बताया कि उन्होंने भारतीय स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में सात साल पहले खाता खुलवाया था। जिसमें उन्होंने 24139 रुपये जमा किए थे। कुछ समय बाद उनकी तबीयत खराब हो जाने के कारण वह बैंक में ईकेवाईसी नहीं करा पाए और उनका खाता बंद कर दिया गया। इससे उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। कहा कि कैंप के बारे में उन्हें बैंक से ही जानकारी हुई। इस पर वह शुक्रवार को विकास भवन सभागार पहुंचे और 24139 का प्रमाण पत्र पाकर चेहरा खिल उठा।
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