खड़िनी। किसानों की आय दोगुनी करने के सरकारी दावे हवाहवाई साबित हो रहे है। मिर्जापुर रजवाहा व सरैया माइनर में पानी न होने के कारण सिंचाई कार्य प्रभावित हो रहा है। इलाके के 50 से अधिक गांवों में सिंचाई के अभाव में धान की पौध तैयार नहीं हो पा रही है। खड़िनी से गुजरने वाली निचली गंग नहर से ही मिर्जापुर रजवाहा व सरैया माइनर को जोड़ा गया है, परंतु नगर विभाग ने इन माइनरों की सफाई कई वर्षों से नहीं करवाई है। इस कारण माइनर में पानी की जगह उगी झाड़ियों ने ले लिया है। आलम यह है कि दूर से देखने पर घास के कारण माइनरों का पता ही नहीं चलता है।
इन माइनरों के पानी से ककरैया, डिगरी, रूपपुर, ग्यासपुर, नगला तोरन, नगला खरगाई, खटकरी, बिराहिमपुर, नगरिया, बसबारी, मौदामई आदि समेत 50 गांवों के खेतों की सिंचाई होती है।
क्षेत्र के किसान हरदेव सिंह ने बताया कि इस समस्या को लेकर कई बार विभागीय अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया गया पर सुनवाई नहीं है।
किसान रणप्रताप सिंह ने बताया कि पास से निकली निचली गंग नहर इस समय उफना रही है पर माइनरों से धूल उड़ रही है। इस समय क्षेत्र में रोपाई के लिए किसान धान की पौध तैयार करने की तैयारी में है। ऐसे में किसानों को अपने निजी साधनों की सहायता से पानी की व्यवस्था करनी पड़ रही है, जो काफी महंगा साबित रहा है। क्षेत्रीय किसान आनंद सिंह, कमल सिंह, पंकज सिंह, संजय सिंह, अमिताभ सिंह, राजू, इंद्रेश, सलीम खां आदि ने प्रशासन से माइनरों में पानी छुड़वाने की मांग की है। सिंचाई विभाग के एक्सईएन सूर्यमणि सिंह ने बताया कि रोस्टर के अनुरूप माइनरों में पानी दिया जा रहा है।