अवैध स्लाटर हाउस पर बैन के शासन के आदेश के बाद जिले की तिर्वा तहसील के अन्नपूर्णा मंदिर में लगने वाला जिले का सबसे बड़ा मवेशी बाजार रविवार को औंधे मुंह जा गिरा। जिस बाजार में प्रत्येक रविवार को करीब 350-400 मवेशियों की बिक्री होती थी, वहीं रविवार को दोपहर दो बजे तक एक गाड़ी मवेशी बिक पाए। पशु बाजार के मुनीम नाथूराम के मुताबिक एक गाड़ी में करीब 18-20 मवेशी आते हैं। योगी सरकार के फैसले का कुछ समर्थन तो कुछ लोग विरोध कर रहे हैं।
तिर्वा बाजार से लोग काटने के लिए भी जानवर खरीद कर ले जाते हैं। बाजार में बिक्री का रिकार्ड दर्ज करने का काम देखने वाले नाथूराम ने बताया कि रविवार को कोई भी भैंसा व भैंस की ऐसी बिक्री नहीं हुई, जो कटने के लिए जा रही हो। सरकार के फैसले के बाद एक भी खरीददार बाजार में ऐसे मवेशियों को लेने नहीं आया।
350-400 जानवरों तक होती है बिक्री
नाथूराम बताते हैं कि प्रत्येक सप्ताह के रविवार को बाजार लगता है। ऐसे में पूरे मैदान में जगह चिह्नित है कि कहां दुधारू मवेशी खड़े किए जाएंगे, किस जगह कटने को जा रहे मवेशियों की बिक्री होगी। बताया कि हर रविवार करीब 350-400 मवेशियों की बिक्री हो जाती थी। सरकार के फैसले के बाद लगने वाले इस बाजार में बमुश्किल 18-20 मवेशियों की ही बिक्री हो पाई।
योगी के फैसले से कुछ किसान खुश
योगी सरकार के फैसले से बाजार के कुछ किसानों के चेहरे पर रौनक दिखी। उन्होंने सरकार के फैसले का सराहा। हसेरन गांव से आए किसान रामऔतार ने बताया कि यदि कोई भैंस 6-7 माह के पेट से है तो किसान उसे दुधारू मवेशी के रूप में खरीदने की बोली लगाता था तो स्लाटर हाउस से जुड़े लोग अपने लिए उस बोली में तीन से चार हजार रुपयों की बढ़ोत्तरी कर देते थे। जिससे किसानों के हाथ से अच्छी भैंस कम पैसे में मिलने वाली भी निकल जाती थी। रविवार को उन्होंने दो भैंसें 30 व 32 हजार रुपये में खरीद ली। योगी सरकार के फैसले के बाद दाम गिरे हैं।
बिचौलिये दिखे मायूस
नाथूराम ने बताया कि आज सैकड़ों किसानों के मवेशियों की बिक्री नहीं हो पाई। बताया कि कई ने तो स्लाटर हाउस के लिए जाने वाले मवेशियों की खरीद-फरोख्त को ही अपना रोजी-रोटी का जरिया बना लिया था। वह हर रविवार को बाजार में आते और 10-12 मवेशियाें की बिक्री में सहयोग कर 10-12 हजार के आस-पास रुपये पैदा कर लेते थे। वह पूरी तरह से बेकार हो गए। ऐसे में किसानाें ने आज बाजार में आकर योगी सरकार के इस फैसले का विरोध जताया।
मवेशी भी कम आए
हर बार बाजार में करीब 10 हजार के आसपास मवेशी पहुंचते हैं, रविवार को करीब 1500-1800 के आसपास मवेशी थे। हर बाजार में करीब 2500-3000 मवेशी ऐसे होते थे जिनकी बिक्री स्लाटर हाउस में ले जाने के लिए होती थी। जो संख्या रविवार को नगण्य थी। न ही खरीदने वाले बाजार पहुंचे और न ही बिक्री करने वाले।
भक्त भी दिखे खुश
रविवार को माता अन्नपूर्णा में दर्शन को भी हजारों भक्त पहुंचते है। उनके चेहरे पर खुले में मीट न बिकने से खुशी दिखी। छिबरामऊ से अपने परिवार के साथ दर्शन करने पहुंची हेमलता ने बताया कि रास्ते पर खुले में मीट की 35-40 दुकानें थी। जो आज एक भी नहीं दिखाई दी। कहा कि इससे भक्तों की आस्था को भी ठेस नही पहुंची।
पुलिस ने भैंसों को खदेड़ा
तिर्वा के अन्नपूर्णा मंदिर परिसर में मवेशी बाजार लगता है। यह बाजार चार भागों में है। एक हिस्से में गाय, दूसरे में भैंस, तीसरे में बकरी व चौथे हिस्से में कट्टा मवेशी आते हैं। रविवार की सुबह से बाजार में कट्टा बाजार में भीड़ लगने लगी तभी तिर्वा कोतवाली पुलिस फोर्स समेत मौकेे पर आ पहुंची। पुलिस को देखते ही पशु बाजार में खलबली मच गई। इधर पुलिस ने बाजार के भैंसों को खदेड़ दिया। इसके बाद देर शाम तक बाजार में सन्नाटा छाया रहा।