विकासखंड तालग्राम क्षेत्र के गांव चटोरापुर व उदारा के ग्रामीणों ने कई महीने से बिजली पोल पड़े होने के बावजूद ठेकेदार द्वारा विद्युतीकरण न कराने पर प्रदर्शन किया।
आरोप लगाया कि टेकेदार सुविधाशुल्क मांग रहा है। रुपया न देने पर काम में देरी कर रहा है। इस दौरान ग्रामीणों ने जल निकासी के लिए नाली न बनी होने, जलभराव के मुद्दे भी उठाते हुए प्रधान व अफसरों के खिलाफ नारेबाजी की।
बुधवार को दोनों गांवों के लोग चटोरापुर में एकत्रित हुए और पूरे गांव में घूम-घूमकर नारेबाजी की। चटोरापुर निवासी जितेंद्र सिंह का कहना है कि दोनों गांवों में करीब 1800 की आबादी है।
विद्युतीकरण कराने के लिए यहां छह महीने पहले खंभे भिजवाए गए थे। तब उम्मीद जगी थी कि जल्द बिजली की सुविधा मिलने लगेगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ठेकेदार गांव के ग्रामीण से प्रति परिवार एक हजार रुपये सुविधाशुल्क मांग रहे हैं।
सुविधाशुल्क न देने पर विद्युतीकरण कार्य पूरा नहीं कराया जा रहा है। ग्रामीणों ने बिजली विभाग के अधिकारियों से शिकायत की तो उन्होंने उदारा में कुछ खंभों को गड़वा दिया लेकिन तार खिंचने व ट्रांसफार्मर स्थापित कर बिजली आपूर्ति चालू कराने की जरूरत नहीं समझी।
गांव के देवेंद्र कुमार ने बताया कि चटोरापुर में सर्वेश के दरवाजे से शंभूदयाल के घर तक जाने वाली मुख्य गली में खड़ंजा जर्जर है। कई जगह गड्ढे हैं। नालियां न बनी होने से घरों का गंदा पानी गलियों में बह रहा है। कई बार प्रधान से कहा गया लेकिन वे पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाते हुए विकास कार्य नहीं करा रहे हैं।
ग्रामीण हरीशंकर का कहना है कि गांव में जल निगम ने छह हैंडपंप लगवाए गए हैं, जिनमें पटवारी लाल, मोहनलाल, गिरीश चंद्र के घर के सामने लगे हैंडपंप कई महीने से खराब हैं। इससे आधे गांव में पीने के पानी की भीषण किल्लत है।
ग्रामीण रामचंद्र, दिगंबर, सतीश चंद्र, श्रीरामसागर, पातीराम, अंगद, आदित्य का कहना है कि क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि उदासीन रवैया अपनाए हैं। शाम होते ही गांव अंधेरे में डूब जाते हैं। समस्या बताने पर भी नेता व अफसर ध्यान नहीं दे रहे हैं। इससे गांव के लोग परेशान हैं।
यदि बिजली, पानी व जल निकासी की समस्या का समाधान शीघ्र न कराया गया तो वे लोग आंदोलन तेज करेंगे। तहसील व कलेक्ट्रेट में जाकर अफसरों के दफ्तरों पर हंगामा करेंगे।