कन्नौज। गुपचुप तरीके से सचिवों के तबादले करना डीपीआरओ के गले की फांस बनता जा रहा है। शासन की स्थानांतरण नीति को ताक पर रखकर सचिवों को उनके मनचाहे ब्लॉकों भेज दिया है। बताया जा रहा है कि इसके लिए सचिवों से सुविधा शुल्क भी लिया गया पर पुष्टि नहीं हो रही है। डीएम ने रविवार को मामले को गंभीरता से लेकर स्पष्टीकरण तलब किया है और इसकी जांच सीडीओ को दी है।
जिला पंचायत राज अधिकारी ने कई सचिवों के कार्यक्षेत्र बदल दिए हैं। डीपीआरओ ने ग्राम पंचायत अधिकारी मनोज कुमार उमर्दा से सौरिख, दीवान सिंह को सौरिख से उमर्दा, संजीव शर्मा छिबरामऊ से गुगरापुर, गौरी शंकर को उमर्दा से छिबरामऊ और राकेश कुमार छिबरामऊ से हसेरन ब्लाक भेज दिया। जिला पंचायत राज अधिकारी राजेंद्र प्रकाश ने कहा कि सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों की वार्षिक स्थानांतरण नीति वर्ष 2025-26 में मुख्य विकास अधिकारी राम कृपाल चौधरी के अनुमोदन पर स्थानांतरण किया गया है।
वहीं, डीएम आशुतोष मोहन अग्निहोत्री ने बताया कि सचिवों के नियुक्ति अधिकारी डीपीआरओ व डीडीओ होते हैं पर शासनादेश में नियम है यदि किसी सचिव के निलंबन के बाद उसकी बहाली होती है तो डीएम से उसका अनुमोदन लेना पड़ता है। जब बहाली के लिए अनुमोदन हो सकता है तो डीपीआरओ ने स्थानांतरण नीति के लिए अनुमोदन क्यों नहीं लिया। पता चला है कि कई सचिवों को उनके गृह ब्लॉक भेजा गया है, जो नियम विरुद्ध है। यदि स्थानांतरण नीति का पालन नहीं किया गया तो सभी तबादले निरस्त किए जाएंगे। यदि सुविधा शुल्क लिया गया है तो इसकी भी जांच कराई जाएगी और कार्रवाई भी होगी।