छिबरामऊ(कन्नौज)। बस हादसे में मृतकों की शिनाख्त के लिए डीएनए टेस्ट की प्रक्रिया चल रही है। अधिकारियों की लापरवाही के चलते 12 दिन बीतने के बाद भी डीएनए के सैंपल विधि विज्ञान प्रयोगशाला में दाखिल नहीं हो सके हैं। दूसरी बार फिर सैंपल वापस कर दिए गए।
क्षेत्र के ग्राम घिलोई में 10 जनवरी को हुए स्लीपर बस हादसे में गायब हुए परिजनों की पहचान के लिए शासन व प्रशासन ने बस में मिले अवशेष इकट्ठे कर विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ भिजवा दिए थे। इन यात्रियों की पहचान के लिए उनके परिजनों के डीएनए की जरूरत थी। हादसे को 12 दिन का समय बीत चुका है। शनिवार को लखनऊ भेजे गए सैंपलों के फार्म में मृतकों का सैंपल देने वालों का संबंध न होने से इन्हें लौटा दिया गया था।
इसके बाद सुधार कर मंगलवार को फिर से सैंपल भेजे गए थे। इन्हें बुधवार को विधि विज्ञान प्रयोगशाला से यह कह कर लौटा दिया गया कि मृतकों के कम से कम दो परिवार के लोगों के सैंपल लेकर आएं। तभी डीएनए टेस्ट संभव है। इससे पुलिस टीम सैंपल लेकर लौट आई। प्रेमपुर चौकी इंचार्ज योगेंद्र शर्मा ने बुधवार को बस हादसे में लापता नूरी के भाई जुबैर उर्फ राजा, नूरी के पुत्र अनस व अमोलर निवासी उर्मिला देवी के पुत्र सचिन व धीरज के डीएनए सैंपल दिलवाए। मुकदमे के विवेचनाधिकारी ने बताया कि अब तक दस लोगों के डीएनए सैंपल इकट्ठे किए जा चुके हैं। इन्हें शुक्रवार को विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ भेजा जाएगा।
इससे पहले इन लोगों का भेजा गया था सैंपल
मंगलवार को प्रशासन ने मोहल्ला जेरकिला निवासी हसीन बानो पत्नी सफीउल्ला (लापता नूरी की मां), कासगंज के गंजडुडवारा निवासी नाजिम वारसी पुत्र वसीम (लापता तान्या के पिता), फर्रुखाबाद के कमालगंज उगरापुर निवासी रईस अहमद पुत्र मो. उमर (लापता लईक का भाई), कानपुर नगर के फेथफुलगंज रेल बाजार निवासी शाहजहां बेगम पत्नी मोहम्मद इरफान (लापता शाहिदा की मां), तालग्राम के अमोलर निवासी उर्मिला देवी पत्नी कृपाशंकर राठौर (लापता प्रिया की मां) का डीएनए सैंपल विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ भेजा गया था।