जिले की जिन ग्राम पंचायतों में 85 फीसदी से अधिक वोटर हैं, उन ग्राम पंचायतों में वोटरों की संख्या 65 फीसदी लाने के आदेश दिए गए हैं। इसके लिए प्रशासन ने 60 अधिकारियों की मानीटरिंग टीम के अलावा बीएलओ व सुपरवाइजरों को सत्यापन के बाद नाम काटने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का आदेश मिलने के बाद बीएलओ तेजी दिखा रहे है। बीएलओ की अधिक तेजी कहीं न कहीं विवाद की स्थित पैदा कर रही है। प्रधानी के चुनाव में खड़े उम्मीदवारों के पास एक-एक वोट का हिसाब है। वोट कटने को लेकर बीलएओ से उलझने का दौर जारी है।
वोट काटने का ऐसा कुछ मामला शुक्रवार को सदर तहसील में देखने को मिला। बारामऊ ग्राम पंचायत के पूर्व प्रधान शाबिर यादव अपने समर्थकों के साथ तहसील पहुंचे। बीएलओ अंकुर व पूजा पर जानबूझकर वोट काटे जाने का आरोप लगाया। इस दौरान पूर्व प्रधान ने कई बार बीएलओ से अभद्रता की। बाद में तहसील के कर्मियों ने किसी तरह समझा-बुझाकर मामला शांत किया।
बीएलओ का कहना है कि जानबूझकर वोट नहीं काटे जा रहे हैं। एसडीएम सुनील कुमार शुक्ला का कहना है कि जिन वोटरों की निर्वाचन आयोग के नियम के अनुसार 18 वर्ष उम्र पूरी नहीं की है। उनको चिन्हित कर वोटर लिस्ट से नाम हटाया जा रहा है। इसके अलावा जो वोटर अब नौकरी के कारण बाहर रहने लगे हैं। उनका कम ही गांव में आना होता है। ऐसे वोटर सूची से हटाए जा रहे हैं। यदि कोई बीएलओ पर दवाब बनाने की कोशिश कर रहा है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
वोटर लिस्ट से नाम काटने से नाराजगी
वोटर लिस्ट से नाम काटने को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है। क्षेत्र की ग्राम पंचायत अनीभोज के मजरा मीरपुर के निवासी रामनिवास, जनवेस कुमार, रामजीत, गोविंद वर्मा, राजेश, अर्जुन सिंह, केसवराम, रामऔतार आदि लोगों ने बताया कि बीते दिनों बीएलओ डयूटी में बीएलओ विवेक कुमार व नीतू सिंह द्वारा मजरे के करीब 60 वोट काट दिए गए हैं। इन लोगों का आरोप है कि जिन लोगों के वोट काटे गए हैं, वह मौजूदा गांव में ही निवास कर रहे हैं। इसके पूर्व भी कई बार हुए चुनाव में भी मतदान कर चुके हैं। फिर भी उनके साथ मतदाता सूची में नाम काटे दिया गया। इस संबंध में खंड विकास अधिकारी को भी अवगत कराया गया है। उच्चाधिकारियों से दोबारा जांच कराए जाने की मांग की है।