इंदुयागंज घाट पुल के दक्षिण छोर पर अधूरी पड़ी सड़क के निर्माण में 22 किसानों की जमीन, खेत व कच्चे-पक्के मकान बाधक हैं। इन्हें 28 लाख 32 हजार रुपये का मुआवजा देने के बाद ही सड़क बन सकेगी। धनराशि शासन से मांगी गई है। बुधवार को एडीएम के तलब करने पर लोक निर्माण विभाग के अभियंताओं ने यह जानकारी दी।
अभियंताओं ने एडीएम रमेश चंद्र यादव को बताया कि कुल 400 मीटर लंबी सड़क बननी है। भूमि अधिग्रहण संबंधी प्रस्ताव करीब सवा साल पहले शासन को भेजा गया था, लेकिन अब तक बजट नहीं मिल सका है। इस वजह से रोड निर्माण की लागत भी 92 लाख रुपये से बढ़कर 1 करोड़ 42 लाख रुपये हो गई है। एडीएम ने प्रस्ताव की एक प्रति अपने पास रखी।
बताया कि अब वे भूमि अधिग्रहण के लिए बजट आवंटन संबंधी समस्या का समाधान कराने के लिए शासन स्तर पर वार्ता करेंगे। जल्द से जल्द बजट आवंटित कराकर अधूरा रोड पूर्ण कराया जाएगा। मालूम हो कि मंगलवार को नदी पार करते समय दर्जन भर से ज्यादा छात्र डूब गए थे। उन्हें ग्रामीणों व नाविकों ने बचाया था।
अमर उजाला ने इंदुइयागंज पुल की समस्या को पहले भी प्रमुखता से प्रकाशित किया था। बुधवार को एडीएम ने लोकनिर्माण के इंजीनियरों को तलब किया। अधिशासी अभियंता संजय श्रीवास्तव के लखनऊ में किसी मीटिंग में जाने पर सहायक अभियंता नीरज वर्मा व अवर अभियंता हेमवीर कसाना कलेक्ट्रेट पहुंचे। एडीएम ने पुल के दूसरी तरफ रोड निर्माण में देरी पर नाराजगी जताते हुए भूमि अधिग्रहण संबंधी प्रस्ताव पर चर्चा की।