कन्नौज। हमीरपुर में निर्माणाधीन पुल गिरने के बाद से इत्रनगरी में भी एक अदृश्य खौफ तैर रहा है। यह खौफ बीमारी का नहीं, बल्कि उन जर्जर पुलों का है जो कभी भी ताश के पत्तों की तरह ढह सकते हैं। ब्रिटिश हुकूमत के दौर में बने ये ऐतिहासिक पुल अब बूढ़े और लाचार हो चुके हैं। अपनी मियाद पूरी कर चुके ये पुल आज हजारों जिंदगियों को दांव पर लगाकर खड़े हैं और किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं।
हरिद्वार से कानपुर को जोड़ने वाली निचली गंगा नहर पर बने ये पुल आज राहगीरों के लिए काल बन चुके हैं। मुख्य रूप से तीन जगहें ऐसी हैं जहां सफर करना खतरे से खाली नहीं है। पहला ठठिया का ऐमा गांव, जहां पुल बीच से दरक चुका है। वहीं इंदरगढ़ का कटैया पुल में ईंटें और कंक्रीट अपनी जगह छोड़ रहे हैं। इसी प्रकार सौरिख का खड़िनी पुल के खंभों में गहरी दरारें आ चुकी हैं। इन पुलों पर हर दिन भारी वाहन, स्कूली बसें और हजारों राहगीर गुजरते हैं। जब भी कोई भारी ट्रक यहां से निकलता है, तो पूरा पुल थरथरा उठता है। ग्रामीणों का कहना है कि पुल पार करते समय दिल की धड़कनें तेज हो जाती हैं।
फाइलों में कैद समाधान
ऐसा नहीं है कि प्रशासन इस खतरे से अनजान है। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने इन तीनों पुलों की जर्जर हालत को देखते हुए अपनी सर्वे रिपोर्ट तैयार की है। इस रिपोर्ट को मंजूरी और बजट के लिए शासन के पास भेज दिया गया है पर हकीकत यह है कि जब तक लखनऊ से बजट की हरी झंडी मिलेगी, तब तक ये जर्जर ढह न जाएं, यही सबसे बड़ा डर है।
फोटो :23: डॉ. रामसेवक लोधी
भारी पड़ सकती अनदेखी
इतिहास गवाह है कि अनदेखी भारी पड़ती है। अंग्रेजों के जमाने के पुल चीख-चीखकर अपनी बदहाली बयां कर रहे हैं। अगर समय रहते शासन ने बजट जारी कर नए पुलों का निर्माण शुरू नहीं कराया, तो जिले को आंसू रोने पड़ सकते हैं। जनता की सुरक्षा के लिए सरकार को कागजी कार्रवाई से बाहर निकलकर युद्धस्तर पर कदम उठाने होंगे।
-डॉ. रामसेवक लोधी, वरिष्ठ सपा नेता
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फोटो :24: कैलाश राजपूत
जल्द बनेंगे सभी जर्जर पुल
जिले में सभी जर्जर पुलों का लोक निर्माण विभाग से सर्वे कराया गया था, जिसमें ब्रिटिश हुकूमत के जर्जर पुलों की जगह नए पुलाें का एस्टीमेट बनाकर शासन को भेजा गया था। दो पुलों के निर्माण को स्वीकृति मिल चुकी है और बजट भी आवंटित हो गया है। जल्द ही सभी जर्जर पुलों को हटाकर नए पुल बनाए जाएंगे।
-कैलाश राजपूत, राज्यमंत्री, विधायक तिर्वा
वर्जन
फोटो :25: दीपेश अस्थाना
सिंचाई विभाग नहीं दे रहा एनओसी
निचली गंग नहर पर ऐमा पुल के लिए 3.30 करोड़ रुपये स्वीकृत हो चुके हैं और टेंडर भी हो चुका है। कटैया पुल के लिए भी वित्तीय स्वीकृति मिल चुकी है। खड़िनी पुल का एस्टीमेट शासन को भेजा गया है। सिंचाई विभाग एनओसी नहीं दे रहा है, जिस कारण काम शुरू नहीं हो पा रहा है।
-दीपेश अस्थाना, अधिशासी अभियंता (पीडब्ल्यूडी)