जिले में रबी के सीजन में किसान फसल दुर्घटना बीमा योजना के तहत किसानों
की फसल का कुल 47 करोड़ 23 लाख 90 हजार रुपये का बीमा हुआ है। इस आशय की
जानकारी बीमा कंपनी की तरफ से जिला प्रशासन को भेजे गए आंकड़ों में दी गई
है।
उप निदेशक कृषि कार्यालय के योजना सहायक सुनील अग्रवाल के अनुसार इस
साल रबी के सीजन में जनपद में फसल दुर्घटना बीमा योजना के तहत बीमा कंपनी
एसबीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी को किसानों की तरफ से कृषक अंश के रूप में 1
करोड़ 63 लाख 23 हजार रुपये का प्रीमियम दिया गया है।
यह प्रीमियम उनके
बैंक से बने किसान क्रेडिट कार्ड से काटकर जमा किया गया है। इसके अलावा
कृषक अंश के रूप में केंद्र सरकार की तरफ से 67 लाख 50 हजार और प्रदेश
सरकार की ओर से 67 लाख 50 हजार रुपये की धनराशि बतौर प्रीमियम बीमा कंपनी
को भेजी गई है।
जिले में 6 हजार 402 हेक्टेयर कृषि क्षेत्रफल में खड़ी
फसलों (आलू व गेहूं) का बीमा किया गया है। आलू में 3798 और गेहूं में 9068
समेत कुल 12866 किसानों का बीमा फसल दुर्घटना बीमा योजना के तहत किया गया
है।
वहीं राजस्व विभाग की तरफ से 25 मार्च तक हुए नुकसान की सर्वे
रिपोर्ट के अनुसार जनपद में कुल 86610 हेक्टेयर कृषि क्षेत्रफल में फसलें
बोई गई थीं।
इनमें से 30952 हेक्टेयर में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचा है।
जिले के 228 गांव ऐसे हैं जहां पर 50 फीसदी से अधिक नुकसान हुआ है, जिसकी
चपेट में 5141 किसान आए हैं। 821.068 हेक्टेयर कृषि क्षेत्रफल की फसल में
50 फीसदी से अधिक का नुकसान पहुंचा है।
गृह मंत्रालय ने तलब की रिपोर्ट, आईबी सक्रिय
फसलों
को हुई क्षति को लेकर केंद्र सरकार की खूफिया एजेंसियों को भी एलर्ट घोषित
कर दिया गया है। बर्बादी की जमीनी हकीकत, सरकारी आंकड़ों का खेल, सरकारी
मशीनरी की सक्रियता, लेखपालों की मनमानी का ब्यौरा सीधे गृह मंत्रालय भेजा
जाएगा। मंगलवार को खूफिया अफसरों ने उप निदेशक कृषि व कलेक्ट्रेट कार्यालय व
किसानों के खेतों पर जाकर सूखे के सूरतेहाल को जांचा।