खुशियों का त्योहार होली नजदीक है। घरों को स्वच्छ करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में रंगाई-पुताई का काम शुरू हो गया है। वहीं, शासन स्तर से इस तरह की खुदाई पर रोक लगी हुई है, लेकिन ग्रामीण मानने को तैयार नहीं हैं। त्योहारों में टीले के धंसने से कई महिलाओं और बच्चों की मौत हो चुकी है, कई घायल भी हो चुके हैं।
त्योहारों पर पीली मिट्टी की तलाश में बच्चे व महिलाएं टीलों की खुदाई में लग जाते हैं। अच्छी और नरम मिट्टी पाने के चक्कर में कई फीट गहराई तक खोदते चले जाते हैं। जिससे ऊपरी भाग कमजोर हो जाता है और एक ही झटके में गिर जाने का डर बना रहता है। प्रशासनिक रोक के बावजूद भी ग्रामीण इस तरह की खुदाई से बाज नहीं आते हैं। पिछले दीपावली पर भी 12 लोग बुरी तरह से जख्मी हो गए थे। वहीं, सात लोग काल के गाल में समा गए थे। सदर एसडीएम डा. अरुण कुमार सिंह ने कहा कि इस तरह मिट्टी खोदने वाले नागरिकों पर नजर रखी जा रही है। उन्होंने सभी नागरिकों से टीलों से मिट्टी न खोदने की अपील की है।
अभी तक टीला धंसने से हुई मौतें
16 अक्तूबर 2016 (महरौबा-ठठिया)
रुचि, पिंकी पुत्री रामकुमार सविता
29 अक्तूबर 2015 (गुरसहायगंज-भीखमपुर)
कंचन पाल की मौत
16 अक्तूबर 2016 (कुतलूपुर-कन्नौज)
रेशमा पत्नी रामचंद्र कठेरिया
खुशी पुत्री संजय कठेरिया
कविता पुत्री नरेश कठेरिया
शेरू पुत्र सर्वेश कठेरिया