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लूट के मामले में पुलिस को कई अहम सुराग हाथ लगे

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सौरिख (कन्नौज)। शनिवार की रात कस्बे में फर्नीचर व्यवसायी रिटायर्ड फौजी के यहां हुई लाखों रुपये की लूटपाट के मामले में पुलिस को कई अहम सुराग हाथ लगे हैं। पुलिस बहुत जल्द ही घटना का खुलासा कर सकती है। पूछताछ के लिए पुलिस ने वादी फौजी समेत चार अन्य लोगों को हिरासत में लिया है।
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मोहल्ला संजयनगर निवासी रिटायर्ड फौजी विनोद कुमार यादव पुत्र भगवान सिंह के यहां शनिवार की रात आधा दर्जन बदमाशों ने धावा बोलकर फौजी को मारपीट कर पांच लाख रुपये की नगदी समेत कई लाख रुपये के जेवरात लूट लिए थे। इस मामले की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। मौके पर पहुंचे पुलिस अधीक्षक ने जहां पूछताछ के बाद गहनता से जांच-पड़ताल की थी। वहीं फिंगरप्रिंट के नमूने भी लिए गए थे। पुलिस की पूछताछ में रिटायर्ड फौजी द्वारा बताई गई कहानी में तमाम झोल नजर आए। पुलिस ने फौजी द्वारा बताई गई सभी बातों को गहनता से लिया और बिंदुवार उनकी जांच-पड़ताल की, तो मामला परत दर परत उलझता चला गया। इसके बाद पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कराने वाले रिटायर्ड फौजी समेत 4 अन्य लोगों को हिरासत में ले लिया। अब पुलिस उनसे पूछताछ में जुटी है। सूत्रों की मानें तो पीड़ित फौजी का कहना था कि वह शाम को ही अपने घर आ गया था और उसने घटना रात 2 से 4 बजे के बीच होने की बताई थी। पुलिस की जांच-पड़ताल में मामला संदिग्ध लगा। फौजी घटना की पूरी रात सकरावा रोड स्थित एक कोल्ड स्टोरेज में ताश के पत्ते खेलता रहा। उसके द्वारा यह कहा जाना कि बदमाशों ने अलमारी आदि तोड़कर नगदी जेवरात पार किए हैं। जब बदमाशों ने उसे मारपीट कर दबोच लिया था और चाबी उनकी जेंब में थी, ऐसे में भला बदमाश क्यों तोड़-फोड़ करेंगे। इसके अलावा सुबह घटना की पुलिस को सूचना बजाय रिटायर्ड फौजी के देने के उधर, से निकल रहे एक युवक ने फोन कर दी थी।

कहीं जुएं में तो नहीं हार गया रकम
लोगों में चर्चा है कि जिस तरह घटना की पूरी रात वह ताश-पत्ते खेलता रहा। ऐसा तो नहीं वह घर में रखी नगदी और जेवरात जुएं में हार गया हो। इसके बाद उसने अपनी साथ हुई लूट की घटना की झूठी कहानी रच दी हो। हालांकि पुलिस इस पूरे मामले पर गंभीरता से जांच कर रही है, जिस कोल्ड स्टोरेज में वह पूरी रात जुआं खेलता रहा। यह बात वहां के गार्ड ने भी स्वीकार की है। उधर, फौजी द्वारा यह बताया जाना कि उसका फर्नीचर आ रहा था, जिसके भुगतान के लिए उसने तीन बैंकों से अलग-अलग रकम निकाली थी। पुलिस ने जब फर्नीचर ला रही उस फर्म से बात की, तो यह बात भी झूठी निकली, जिससे पुलिस को वादी पर ही शक गहराता चला गया।
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