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फुंके ट्रांसफार्मर से कमाई कर रहे ठेकेदार

Mon, 02 Mar 2015 11:47 PM IST
अमर उजाला कन्नाैैज
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ग्रामीण व शहरी इलाकों में फुंके ट्रांसफार्मर बदलने के नाम पर ठेकेदार दोहरी कमाई कर मालामाल हो रहे हैं। इसका खामियाजा उपभोक्ता चंदा के नाम पर इकट्ठा होने वाली धनराशि को देकर भुगत रहे हैं। चंदे की रकम से फुंका ट्रांसफार्मर गांव, कसबे से स्टोर तक पहुंचता है, लेकिन उसे कागजों पर ठेकेदार अपने नाम दर्ज कराकर शासन से मिलने वाली धनराशि का लाभ ले लेते हैं।
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बिजली विभाग के नियमों की मानें तो यदि कोई ट्रांसफार्मर खराब होता है तो उसे वर्कशाप या स्टोर तक लाने का खर्च सरकार वहन करती है। बदले में नया ट्रांसफार्मर मौके पर ले जाकर बदलवाने और संबंधित स्थान पर फिट कराने का खर्च भी सरकार देती है। कांग्रेसी नेता अनुज मिश्र कक्का कहते हैं कि ज्यादातर स्थानों पर जब ट्रांसफार्मर फुंक जाते हैं तो उन्हें वर्कशाप व स्टोर तक ले जाने का काम ठेकेदार गांव वालों के हवाले कर देते हैं।

उन्हें चंदा करके आपस में रुपया इकट्ठा करने और खुद ही किराए पर ट्रैक्टर लेकर ट्रांसफार्मर लदवाकर वर्कशाप तक पहुंचाने को कहा जाता है। जिस गांव के लोग चंदा करके ट्रांसफार्मर सुधार के लिए पहुंचाने से इनकार करते हैं। वहां पर फुंका ट्रांसफार्मर कई-कई महीने तक पड़ा रहता है। ठेकेदार जानबूझकर उसे उठाने नहीं जाते। बिजली संकट से जूझ रहे लोग बाद में मजबूर होकर अपने पास से चंदा करके रुपया खर्च कर ट्रांसफार्मर खुद ही ढोकर ले जाते हैं। वहीं कागजों पर इन ट्रांसफार्मरों को खुद लाने की इंट्री कराकर ठेकेदार सरकार से मिलने वाली धनराशि डंप कर रहे हैं।
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विभाग की तरफ से मिलता है खर्चा
बिजली विभाग ने फुंके व खराब ट्रांसफामरों को संबंधित क्षेत्र से उठाकर वर्कशाप व स्टोर तक पहुंचाने का ठेका दो फर्मों मे. वरुण इंटरप्राइजेज कन्नौज के प्रो. कौशलेंद्र सिंह व मे. राजीव कुमार सिंह हरदोई को दे रखा है। इन ठेकेदारों के हवाले पूरे जिले के सभी डिवीजन क्षेत्र आते हैं। इनके पास नया ट्रांसफार्मर भिजवाने व खराब ट्रांसफार्मर को लाने की जिम्मेदारी है। 10 से 100 किलोवाट तक का ट्रांसफार्मर लाने व ले जाने पर ठेकेदार को 1000 रुपये का खर्चा मिलता है। वहीं 100 केवीए से अधिक क्षमता के ट्रांसफार्मर को बदलने के लिए लाने-ले जाने व फिट करने का खर्चा 3000 रुपये प्रति ट्रांसफार्मर मिलता है।


जांच तो हो खुल जाए पोल
ग्रामीणों का कहना है कि ज्यादातर क्षेत्र के लोगों को यह बात नहीं पता है कि फुंका ट्रांसफार्मर ले जाने के बदले में ठेकेदार को सरकार से रुपया मिलता है। स्टोर व वर्कशाप के रिकार्ड में दर्ज की गई इंट्री की सच्चाई जानने के लिए संबंधित गांव जाकर टीमें पूछताछ करें तो ठेकेदारों का गोलमाल सामने आ जाएगा।

ग्रामीणों को अपने गांव में घरेलू विद्युत आपूर्ति के लिए लगाए गए ट्रांसफार्मर को फुंकने पर उसकी सूचना विभागीय अधिकारियों को देनी चाहिए। ग्रामीण बिना सूचना दिए फुंका ट्रांसफार्मर वर्कशाप ले आते हैं। जबकि यह काम ठेकेदारों को दिया गया है। ठेकेदार ही ट्रांसफार्मर खंभे से उतराएं।

वाहन पर लदवाएं और वर्कशाप में जमा करेंगे। नया ट्रांसफार्मर स्टोर से स्टीमेट लगाकर निकलवाने, दोबारा ट्रैक्टर पर लदवाने व गांव में लगाने की जिम्मेदारी ठेकेदार की है। लोग चंदा करके कोई भी ट्रांसफार्मर न लाएं। यदि ठेकेदार चंदा मांगे तो शिकायत करें। जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
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- पी. राम, अधिशासी अभियंता विद्युत।
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ट्रांसफार्मर बदलवाने के नाम पर वसूली
ॎ ट्रांसफार्मर उतारकर ट्रैक्टर ट्राली पर रखवाने का रेट 600 रुपये।
ॎ ट्रैक्टर भाड़ा 600 रुपये से लेकर 1100 रुपये।
ॎ वर्कशाप में नया ट्रांसफार्मर ट्राली पर लादने के 300 रुपये।
ॎ जल्दी ट्रांसफार्मर देने के नाम पर 5 से 8 हजार रुपये की वसूली।
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