कन्नौज। सदर कोतवाली के मानीमऊ स्थित मुखिया कोल्ड स्टोरेज में रविवार सुबह भीषण आग लग गई। आग की चपेट में चेंबर (आलू रखने की रैक) पूरी तरह से नष्ट हो गए। दीवारों में भी दरारें पड़ गईं। शुरुआत में दो दमकलों ने आग पर काबू पाने का प्रयास किया गया। आग की भयावहता देख तिर्वा व छिबरामऊ से चार दमकलें और मंगाई गईं। बाद में कानपुर से तीन दमकलें और बुलानी पड़ीं। करीब आठ घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। उधर, घटना देख कोल्ड स्टोरेज मालिक को हार्टअटैक पड़ गया। उन्हें जिला अस्पताल से कानपुर रेफर कर दिया गया। अग्निकांड से करीब 30 लाख का नुकसान बताया जा रहा है। आग लगने का कारण शार्ट सर्किट बताया जा रहा है।
आलू की निकासी के बाद अगले सीजन के लिए कोल्ड स्टोरेज में मरम्मत का कार्य शुरू है। रविवार की सुबह एक कर्मचारी टूटी हुई पाइप लाइनों में वेल्डिंग कर रहा था। दोपहर 12 बजे अचानक वेल्डिंग के दौरान शार्ट सर्कि ट होने से चेंबर में गले थरमाकोल में आग लग गई। कर्मचारी शोर मचाते हुए बाहर निकला, लेकिन तब तक लपटें चेंबर के ऊपर खिड़कियों से निकलने लगी। आनन-फानन दमकल कर्मियों को जानकारी दी गई। सीएफओ एमपी सिंह व एफएसओ शिवराम यादव दो दमकलों के साथ मौके पर पहुंचे। दोनों ओर से पानी की बौछारें छोड़ी गईं लेकिन आग पर काबू नहीं पाया जा सका। इसके बाद छिबरामऊ व तिर्वा से चार और गाड़ियां मंगाई गईं। इसी बीच सीएफओ ने एसपी हरीश चंदर को सूचना देकर कानपुर से गाड़ियां मंगवाने को कहा। करीब तीन घंटे के बाद कानपुर से तीन दमकल गाड़ियां मौके पर पहुंची। नौ गाड़ियों ने करीब आठ घंटे तक चाराें ओर से पानी की बौछारें छोड़कर चेंबर में लगी आग को शांत किया। घटना देख कोल्ड स्वामी को पुनीत दुबे को दिल का दौरा पड़ गया। आननफानन में परिजन उन्हें लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें कानपुर रेफर कर दिया गया।
तो इसलिए इतनी जल्दी फैली आग
कन्नौज। शीतगृह का चेंबर बनाने के दौरान उसके तापमान को ठंडा रखने के लिए उसमें थरमाकोल का इस्तेमाल किया जाता है। जानकारों की माने तो थरमाकोल को दीवार में चिपकाया जाता है। उसे चस्पा करने के लिए तारकोल का इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा लेंटर की सतह पर धान की भूंसी भरी जाती है जिससे चेंबर के तापमान को हर समय ठंडा रखा जा सके। थरमाकोल जहां तेजी से आग पकड़ता है तो तारकोल आग में घी जैसा काम करता है। भूंसी काफी देर तक आग के तापमान को बराबर बनाए रखती है। तीनाें चेंबर में बड़ी मात्रा में होने के कारण आग करीब आठ घंटे तक जलती रही।
अग्निशमन यंत्र होता तो जल्द काबू में आती आग
कन्नौज। जिला प्रशासन की ओर से हर साल अग्निशमन यंत्र के बारे में जागरूकता अभियान चलाया जाता है। कई बार कोल्ड मालिकों को इसे रखने की चेतावनी भी दी जाती है। इसके बाद भी कई व्यापारी इसमें लापरवाही करते है। रविवार को कोल्ड में लगी आग में यह लापरवाही भी सामने आई। चेंबर में कोई अग्निशमन यंत्र नहीं था। मानक के अनुसार अग्निशमन के यंत्र होना जरूरी होता है। विभाग के अधिकारियों की माने तो जैसे ही आग लगी थी यदि उस समय तत्काल अग्निशमन यंत्र से आग बुझाने का प्रयास किया जाता तो स्थिति काबू में हो सकती थी लेकिन कोल्ड चेंबर में कोई अग्निशमन यंत्र की व्यवस्था कोल्ड मालिक की ओर से नहीं की गई थी।
आसपास लगे नलकूप भी चलवाए गए
कन्नौज। कोल्ड स्टोरेज में लगी आग के बाद बुझाने पहुंची दमकल गाड़ियाें को पानी की उपलब्धता कराने के लिए कोल्ड कर्मचारियाें ने आसपास के नलकूपाें को चलवा दिया जिससे साइफन के माध्यम से हर दमकल गाड़ी तक उसके वाटर टैंक खत्म होने से पहले ही भरा जाता रहा। इससे दमकल गाड़ियों से लगातार पानी की बौछार कोल्ड में लगी आग पर होती रही। दमकल विभाग का भी मानना है कि यदि पानी का चक्र टूट जाता तो आग को काबू करना कठिन हो जाता।
कर्मचारियों ने एक-दूसरे को तलाशा
कन्नौज। कोल्ड के चेंबर में आग लगने के बाद सभी कर्मचारी कोल्ड के बाहर भाग कर जमा हो गए। इस दौरान कर्मचारी एक दूसरे को देखते रहे और पूछते रहे कि कोई कर्मचारी चेंबर के अंदर तो नहीं रह गया है। भीषण आग लगने से धुएं का गुबार इतना तेज था कि आसपास गांव के सैकड़ों ग्रामीण मौके पर जमा हो गए। इससे वहां अफरातफरी का माहौल बन गया। इससे पुलिस को लाठियां पटककर लोगाें को कोल्ड स्टोरेज से दूर हटाया। पुलिस को डर था कि दीवार में दरारें आने से कहीं दीवार फटकर किसी के ऊपर न गिर पड़े।
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सूचना पाकर कई कोल्ड स्वामी पहुंचे
कन्नौज। मानीमऊ के मुखिया कोल्ड स्टोरेज में आग की खबर सुनकर जनपद के कई कोल्ड स्वामी मौके पर पहुंच गए। इनमें में राम दीक्षित, मनोज दीक्षित, ओमप्रकाश तिवारी समेत कई कोल्ड मालिक ने मौके पर पहुंच कर आग बुझाने और कई चीजाें से बचाव करने की जानकारी दमकल विभाग के कर्मचारियों को दी।
कोल्ड में आलू होता तो लगती करोड़ों की चपत
कन्नौज। मुखिया कोल्ड स्टोरेज में आग लगने की घटना यदि चेंबर में आलू भरे होने के दौरान होती तो करोड़ों रुपये का नुकसान हो जाता लेकिन बीते सप्ताह ही चेंबर से पूरा आलू निकाला जा चुका था। चेंबर की सफाई भी हो चुकी थी। इसीलिए मरम्मत का काम चल रहा था।