मुख्यमंत्री की सुरक्षा में लगे जिला व पुलिस प्रशासन
के अफसरों, बल्कि कमांडो तक को उनके कन्नौज दौरे के दौरान खासा पसीना
बहाना पड़ता है। सीएम कहां रुक जाएं, कब कार से निकल आएं और किसे अपने पास
बुला लें, इसका अंदाजा हुक्मरान नहीं लगा पाए।
इत्र नगरी से राजनीति का
ककहरा सीखने वाले सीएम अखिलेश यादव ने विपक्ष में रहते हुए तमाम आंदोलन किए
थे। तब वह कभी सभाओं तो कभी धरना प्रदर्शन व जाम के दौरान सड़कों पर
कार्यकर्ताओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर बैठते रहे हैं। अब मुख्यमंत्री
बनने के बाद भी जब वह कन्नौज आते हैं, तो करीब आने के लिए व्याकुल
कार्यकर्ताओं को देखकर दूरियां कम करने से खुद को नहीं रोक पाते।
रविवार को
पहले तो प्रशासन ने हैलीपैड से लेकर कार्यक्रम स्थल तक सख्ती बरती। जीटी
रोड से वाहनों तक को नहीं गुजरने दिया। रस्सा लगाकर पहले वाहनों को रुकवा
दिया। दर्जनों बार रेलवे पटरी किनारे, खेतों, ढाबों व दुकानों पर बैठे
सपाइयों को पीछे कर दिया। कभी लाठी दिखाई तो कभी हाथ पकड़कर एक किनारे
किया। इसके बावजूद सपाई आसपास ही डटे रहे।
दो युवक एक कमांडो से परिचय
निकाल हैलीपैड गेट के अंदर घुस गए पर बाद में उन्हें पुलिस अफसरों ने वापस
लौटा दिया। शादी समारोह में शामिल होने के बाद वापस लौटते समय सपाई सीएम के
नजदीक पहुंचने के लिए टूट पड़े। खुद से मिलने के लिए कार्यकर्ताओं व
नेताओं को जूझते देख सीएम पसीज गए।
इसके बाद उन्होंने खुद निर्देश देकर
जगह-जगह फ्लीट रुकवाई। यह देख एक ओर जहां कार्यकर्ता आगे बढ़े वहीं दूसरी
ओर रोक रहे पुलिस व प्रशासन के अफसर से लेकर दरोगा व सिपाही के कदम पीछे
हटते गए। मजे की बात तो यह रही कि पास पहुंचने के बाद जब सीएम ने कई लोगों
से पूछा कि बताओ क्या बात है तो उन्हें यही जवाब मिला कि भइया आपको को पास
से देखने आए हैं।
इस पर वह खुद मुस्करा उठे। कई को उन्होंने हंसते हुए
समझाया कि बगैर किसी काम के इतना धक्कामुक्की की आदत ठीक नहीं है।