कन्नौज। इत्रनगरी में ठंड का सितम जारी है। शुक्रवार को न्यूनतम तापमान 5.5 डिग्री और अधिकतम तापमान 15 डिग्री सेल्सियस रहा। पहाड़ी राज्यों में हो रही भारी बर्फबारी के बाद वहां से आ रही बर्फीली उत्तर-पश्चिमी हवाओं ने मैदानी इलाकों में ठिठुरन बढ़ा दी है। वहीं, दिनभर आसमान में घने काले बादल छाए रहे। सूर्य देवता के दर्शन तक नहीं हुए। इन बादलों ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी कर दी हैं। खेतों में तैयार फसलों पर अब बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि का खतरा मंडराने लगा है।
कई दिनों से जिले में घने कोहरे के कारण दृश्यता शून्य रही है। इससे वाहन चालक लाइट और डिपर जलाकर चलते दिखे। घने कोहरे की चादर ने सड़कों और रेल पटरियों को चपेट में ले लिया है। सुबह मौसम केंद्र पर दृश्यता 10 से 20 मीटर दर्ज की गई। इसका सीधा असर यातायात पर पड़ा है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, कोहरे के कारण प्रयागराज से आने वाली कालिंद्री एक्सप्रेस समेत आठ ट्रेनें निर्धारित समय से तीन से चार घंटे की देरी से चल रही हैं।
वर्तमान में गेहूं, सरसों और आलू की फसलें खेतों में लहलहा रही हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय होने वाली तेज बारिश या ओलावृष्टि फसलों के लिए जहर के समान साबित हो सकती है। विशेष रूप से आलू में अधिक डर देखा जा रहा है क्योंकि अधिक नमी से गलने और झुलसा रोग लगने की संभावना बढ़ जाती है। वहीं, तेज हवाओं के साथ बारिश होने पर गेहूं की फसल खेत में बिछ सकती है जिससे पैदावार में गिरावट आ सकती है।
जलालाबाद के किसान बबलू दुबे ने बताया कि दिन-रात एक करके फसल तैयार की है। अब जब कटाई और मुनाफे का समय आ रहा है, तो मौसम दगा देता दिख रहा है। अगर बारिश हुई, तो लागत निकालना भी मुश्किल हो जाएगा। वहीं, मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को फिलहाल सिंचाई रोकने की सलाह दी है। मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के कारण अगले 48 घंटों तक मौसम का मिजाज ऐसा ही बना रह सकता है। यदि बारिश हुई, तो किसानों को भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ सकती है। फिलहाल, किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए भगवान से बस यही प्रार्थना कर रहे हैं कि उनकी मेहनत पर पानी न फिरे।
आगामी 48 घंटों तक ठंड से राहत मिलने के आसार नहीं हैं। विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए अगले कुछ दिनों तक घना कोहरा छाने और शीतलहर जारी रहने की चेतावनी दी है। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वह केवल आवश्यक कार्य होने पर ही घर से बाहर निकलें।
- डॉ. अमरेंद्र कुमार, मौसम वैज्ञानिक