उच्च शिक्षा में में अध्यनरत छात्रों की जुलाई माह में कक्षाओं को शुरू कराए जाने के शासन के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। जिले में संचालित दोनों सरकारी महाविद्यालयों में प्रवेश आवेदन फार्मों की बिक्री अभी तक शुरू नहीं हो सकी है। जिला मुख्यालय पर स्थित पीएसएम महाविद्यालय में मंगलवार से आवेदन फार्मों की बिक्री शुरू कर दी गई। पहले दिन 60 फार्म बिके। वहीं छिबरामऊ के नेहरू महाविद्यालय में 15 जून से ही आवेदन फार्म बिक रहे हैं।
शासन ने निर्देश दिए थे कि जुलाई में कक्षाओं का संचालन शुरू कराए जाने के लिए जून से प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी जाए। ताकि समय से एडमीशन का कार्य खत्म हो जाए। इसके बाद भी जिले में अनौगी में स्थित राजकीय महाविद्यालय व कन्नौज बांगर में स्थित राजकीय महिला महाविद्यालय में अभी तक प्रवेश फार्म की बिक्री नहीं शुरू हो सकी है। पीएसएम महाविद्यालय ने बीए, एमए प्रथम वर्ष के लिए आवेदन फार्मों की बिक्री मंगलवार को शुरू हुई।
प्राचार्य डा. सुनीति मिश्रा ने कहा कि आवेदन फार्म की बिक्री शुरू कर दी गई है। समय से दाखिले की प्रक्रिया पूर्ण कर ली जाएगी। उन्होंने बीए में दाखिला लेने वाले छात्र-छात्राओं को निर्देश दिए कि वह आवेदन फार्म जमा करते समय टीसी प्रति अवश्य लगा दें। बीए में 480 व एमए में 170 सीटें निर्धारित है। आवेदन फार्मों की बिक्री 7 जुलाई तक चलेगी।
नौ जुलाई को योग्यता सूची जारी कर दी जाएगी। राजकीय महाविद्यालय अनौगी के प्राचार्य ब्रह्मदेव का कहना है कि जून माह में आवेदन प्रक्रिया चालू किए जाने का उनके पास कोई आदेश नहीं है। स्टाफ के कर्मचारियों से संपर्क किया जा रहा है। जल्द ही आवेदन फार्मों की बिक्री शुरू करा दी जाएगी।
कॉलेज खुलते ही शुरू हुई नेतागीरी
पीएसएम महाविद्यालय खुलते ही छात्र नेताओं ने अपनी नेतागीरी चमकानी शुरू कर दी है। छात्र नेताओं ने महाविद्यालय प्रशासन से प्रवेश फार्म की बढ़ाई गई फीस वापस लेने की मांग की। कहा कि गरीब छात्र-छात्राओं के लिए प्रासपेक्टस के लिए निर्धारित की गई धनराशि अधिक है। छात्र नेता अनंत यादव, चंद्रभान यादव, अजय शर्मा, तौशीफ, संदीप यादव, अमिर, राजू यादव, सौफियान, जिया उल हक, बदन सिंह ने प्राचार्य को शिकायती पत्र दिया।
इसमें बताया कि महाविद्यालय में वर्ष 2013 में प्रवेश फार्म 80 रुपये का था। 2015 में इसे बढ़ाकर 120 रुपये कर दिया गया। महाविद्यालय में ग्रामीण क्षेत्र से पढ़ने के लिए आने वाले छात्र-छात्राओं के लिए यह धनराशि अधिक है। छात्र नेताओं ने कहा कि उनकी मांग पर विचार न किया गया तो वह धरना-प्रदर्शन के लिए बाध्य होंगे। प्राचार्य सुनीति मिश्रा ने कहा कि लगातार बढ़ रही महंगाई के चलते प्रवेश फार्म की धनराशि बढ़ाई गई है। इसको छपवाने में भी काफी खर्चा आता है। उसमें महाविद्यालय स्टाफ सहित फीस, प्रवेश प्रक्रिया का पूरा विवरण दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि छात्र नेताओं को शायद संज्ञान में नहीं है कि प्रासपेक्टस से जमा हुई धनराशि मैनेजमेंट के पास नहीं जाती। इस धनराशि के लिए एक अलग एकाउंट है, जिसमें उस धनराशि को जमा किया जाता है। खर्चों से बचने वाली धनराशि महाविद्यालय के विकास में खर्च होती है।