छिबरामऊ। फर्रुखाबाद से चलकर जयपुर जाने वाली विमल बस सर्विस ट्रैफिक नियमों को अपने ठेंगे पर रखती है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता
है कि ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने पर गैर प्रांत सहित सूबे के छह जनपदों में इस बस का चालान कट चुका है। परिवहन विभाग के अफसर इस बस की
पूरा इतिहास खंगालने में लगे हुए हैं।
रविवार को प्रतिसार निरीक्षक जितेंद्र सिंह व पीटीओ (यात्री मालकर अधिकारी) रामबाबू दोहरे सौ शैय्या अस्पताल पहुंचे। उन्होंने घायलों का हालचाल जाना। पीटीओ ने बताया कि हादसे में जली बस फर्रुखाबाद के गढ़ी जदीद मोहल्ले की रहने वाली प्रीती चतुर्वेदी पत्नी विमल कुमार चतुर्वेदी के नाम पर रजिस्टर्ड है। इस बस का फिटनेस सर्टिफिकेट 17 दिसंबर 2021 तो बीमा तीन अगस्त 2020 तक वैध है। इस बस का पंजीकरण 30 सितंबर 2016 को हुआ था। ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने पर बस का 14 फरवरी 2018 को फर्रुखाबाद, 26 फरवरी 2018 को मथुरा, जून 2018 को फर्रुखाबाद, 18 अगस्त 2018 को अलीगढ़, 27 जनवरी 2019 को हापुड़, 14 मार्च 2019 को दिल्ली (दो बार), तीन जुलाई 2019 को संत कबीरनगर में परिवहन विभाग से मानकों की अनदेखी में चालान किया जा चुका है। 25 मार्च 2019 को पुलिस द्वारा गौतमबुद्ध नगर में भी एक बार चालान हुआ है।
बगैर परमिट के नहीं चलने दी जाएंगी डबल डेकर बसें
यात्री मालकर अधिकारी रामबाबू दोहरे ने बताया कि बगैर परमिट के डबल डेकर बसों को किसी भी सूरत में नहीं चलने दिया जाएगा। यात्रियों की जिंदगी की
सुरक्षा करने के लिए परिवहन विभाग मुस्तैद है। इसके अलावा मानकों की अनदेखी करने वाले वाहनों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
73 यात्रियों का होता है पास
परिवहन विभाग के अधिकारियों की मानें तो स्लीपर बस में 73 यात्रियों के बैठने की व्यवस्था होती है। जिसमें बस में दोनों तरफ बने स्लीपरों में 24 व 49 यात्रियों के सीट पर बैठने की व्यवस्था होती है। हालांकि हादसे के समय बस में कितने यात्री मौजूद थे, इसका आंकड़ा कोई भी अधिकारी बताने से बचता नजर आ रहा है।
दिल्ली के व्यापारी का था ट्रक
जीटी रोड पर ग्राम घिलोई के सामने हुए हादसे के बाद परिवहन व पुलिस विभाग के अधिकारियों ने जांच की गति को बढ़ा दिया है। परिवहन विभाग के अधिकारियों की मानें तो स्लीपर बस से टक्कर में जो ट्रक जला वह दिल्ली के अशोक नगर निवासी राकेश कुमार मेहता के नाम पर पंजीकृत है। यह ट्रक सोनीपत से संचालित होता है। हालांकि ट्रक कहां से चलकर कहां जा रहा था, इस पर अधिकारी अभी तक स्पष्ट रूप से कुछ भी नहीं बोल पा रहे हैं।
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हर सुख सुविधा का ध्यान रखा जाएगा। प्रशासनिक व परिवहन अधिकारियों से खाद्य सामग्री पाकर घायल यात्रियों के चेहरे पर खुशी दिखाई दी।