कोतवाली पुलिस ने बीएसएफ जवानों के साथ मिलकर रविवार
की रात तीन बजे के बाद भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य सुब्रत पाठक के आवास
एवं कारखाने में दबिश दी। करीब दो घंटे तक सघन तलाशी ली गई। हालांकि, इस
दौरान कोई भी आपत्तिजनक वस्तु पुलिस को नहीं मिली।
इस दौरान भाजपा नेता की
मां एवं नगर पालिकाध्यक्ष और पुलिस अफसरों के बीच नोकझोंक भी हुई। भाजपा
नेता के भाई छोटू पाठक ने बताया कि सुबह करीब तीन बजे दर्जनों वाहनों के
काफिले के साथ पुलिस, पीएसी व बीएसएफ ने मोहल्ला पठकाना स्थित उनके घर व
प्रतिष्ठानों को चारों तरफ से घेर लिया।
इसके बाद अंदर घुसकर कमरों,
बरामदों, किचन का कोना-कोना छान मारा। घर में कुछ भी आपत्तिजनक वस्तु न
मिलने पर निकट में स्थित कारखाने पहुंचे। यहां पर भी चप्पे-चप्पे पर सर्च
किया। सुबह पांच बजे के बाद फोर्स वापस खाली हाथ लौट गया। पालिका चेयरमैन
सरोज पाठक ने प्रशासन की इस कार्रवाई की निंदा की।
उन्होंने कहा कि पुलिस व
प्रशासन के अधिकारी पद की गरिमा के अनुरूप कार्य नहीं कर रहे हैं। सपा के
इशारे पर दबिश दी गई है। भाजपा सरकार आने पर उत्पीड़न करने वालों से हिसाब
चुकता किया जाएगा। उधर, छापामारी की सूचना पाकर दर्जनों भाजपा नेता
मौके पर पहुंच गए।
भाजपा नेता तरुण चंद्रा ने कहा कि प्रशासन का यह कदम
अनुचित है। कार्यकर्ताओं के बाद अब पदाधिकारियों को परेशान करने के लिए
सरकारी तंत्र का दुरुपयोग किया जा रहा है। उधर, पालिका के कई सभासदों ने
गवर्नर को पत्र भेजकर कन्नौज में बीते दिनों हुए हिंसक संघर्ष में एकतरफा
कार्रवाई की शिकायत की है।
सभासद पवन अवस्थी, श्याम तिवारी, राजेश दिवाकर,
सुमन, स्वामी अखंडानंद, विनय प्रजापति, शिवदयाल कुशवाहा, कंचन गुप्ता,
विमलेश वर्मा, अजयपाल, वासुदेव आदि ने पत्र में लिखा कि दुर्गा विसर्जन
यात्रा के दौरान संप्रदाय विशेष के लोगों ने फायरिंग की, जिसमें महेश
कुशवाहा की गोली लगने से मौत हो गई, जबकि कई श्रद्धालु घायल हो गए।
इसके
बाद से माहौल खराब है। आरोप है कि पुलिस-प्रशासन ने विसर्जन यात्रा में
पर्याप्त पुलिस बल नहीं लगाया था। यदि पर्याप्त पुलिस बल होता तो उपद्रवी
घटना को अंजाम न दे पाते। दोषियों पर समय से कार्रवाई करने की बजाय पुलिस
ने रविवार की रात पालिकाध्यक्ष सरोज पाठक के घर में दबिश देकर उत्पात मचाया
व बदसलूकी की।
सभासदों का कहना है कि पुलिस की इस कार्रवाई की वे निंदा
करते हैं। सभासदों ने मांग की कि हिंसक घटना की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी
या सीबीआई से कराई जाए।