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भट्ठा मालिक ने भगाया, अलीगढ़ से पैदल आ गए कन्नौज

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कन्नौज। अलीगढ़ में भट्ठे पर काम करने वाली करीब तीस महिलाओं, बच्चों व पुरुषों को मालिक ने लॉकडाउन में भट्ठा बंद होने की सूरत में नौकरी से निकाल दिया। भट्ठा मालिक ने घर जाने के लिए रुपये भी नहीं दिए। ऐसी स्थिति में प्रवासी मजदूर पैदल बिहार के लिए निकल लिए। चाइल्ड लाइन ने कन्नौज सीमा से सुपुर्दगी लेकर कानपुर सेंट्रल से बिहार भिजवाया।
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अलीगढ़ से करीब एक वर्ष से पंद्रह वर्ष के 15 बच्चे, इनके माता-पिता सहित करीब तीस लोग अलीगढ़ के भट्ठे से पैदल बिहार के लिए निकले। कन्नौज की सीमा तक पहुंचने में कई दिन लग गए। पैदल चलता देख किसी ने मामले की जानकारी चाइल्ड लाइन को दी। चाइल्ड लाइन ने जिला समन्वयक तनवीर अहमद को भेजा। जिला समन्वयक सभी को पिकअप से कन्नौज लाए। इन्हें खाना खिलाया। मामले की जानकारी कानपुर चाइल्ड लाइन को दी गई। सभी प्रवासियों को कन्नौज से पिकअप से सेंट्रल स्टेशन भेजा गया। यहां कानपुर की चाइल्ड लाइन पहले से मौजूद थी। बाल संरक्षण अधिकारी विजय राठौर ने बताया कि सेंट्रल स्टेशन पर आरपीएफ से बातचीत कर सभी की बिहार के लिए टिकट कराई गई। ट्रेन के आने पर सकुशल बिहार के लिए रवाना किया गया।
परिवार के छलक उठे आंसू
बाल संरक्षण अधिकारी के मुताबिक टीम के सदस्यों ने बताया कि उन्हें पिकअप से कन्नौज लाया गया। खाना खिलाने के दौरान व ट्रेन से रवाना होते समय सभी लोगों के आंसू निकल आए। कहा कि वह लोग उन लोगों के लिए किसी फरिश्ता से कम नहीं हैं। इन छोटे-छोटे बच्चों के साथ बिहार पहुंचना उनके लिए काफी मुश्किल था। इस बड़ी विपदा में भगवान ही उनका सहारा बने हैं।
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