फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

भाइयों की कलाई पर बांधा प्यार, लिए उपहार

Sat, 29 Aug 2015 11:46 PM IST
अमर उजाला कन्नाैैज
विज्ञापन
विज्ञापन
भाई-बहन के अटूट प्यार का त्योहार रक्षाबंधन शनिवार को हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। सुबह से ही कस्बे की मिठाइयों की दुकान पर लोगों की भीड़ जुटने लगी। वहीं नन्हें-मुन्ने बच्चों में भी त्योहार का खासा उत्साह दिखाई दिया। सुबह से ही वह रंग बिरंगे परिधानों में नजर आए।
विज्ञापन


रक्षाबंधन के त्यौहार पर फैंसी राखियों के अलावा मिठाई, रेडीमेड कपड़ों, सौंदर्य प्रसाधन के सामान की जोरदार बिक्री हुई। बहनों ने अपने भाइयों के घर पहुंचकर उनके माथे पर तिलक लगाकर कलाई में राखी बांधी। भगवान से उनकी दीर्घायु की कामना भी की। वहीं भाइयों ने अपनी बहनों को उपहार भेंट किए। शाम होते ही लोग घरों से घूमने निकल पड़े। रेस्टोरेंट में भी लोगों की खासी भीड़ दिखाई दी।

 बहनों को इस बार अपने भाई की कलाई पर राखी बांधने के लिए दोपहर तक शुभ मुहूर्त का इंतजार करना पड़ा। दरअसल इस बार शनिवार दोपहर 1.53 बजे से रात 7.50 बजे के बीच ही राखी बांधने का शुभ मुहूर्त था। ऐसे में बहनों ने राखी बांधने के बाद ही अपना व्रत तोड़ा। ज्योतिषाचार्यों ने बताया कि भद्रा नक्षत्र के कारण राखी बांधने को दोपहर तक इंतजार करना पड़ा।
विज्ञापन


तालाब की जगह नाले में सिराईं भुजरियां
रक्षाबंधन के त्योहार पर शनिवार को सुबह से दोपहर तक जहां भाइयों को राखी बांधने का सिलसिला चला। वहीं दोपहर बाद सिद्धपीठ गंगेश्वरनाथ मंदिर के पास लोगों ने भुजरियां जलदेवता को समर्पित कीं। हालांकि तालाब तक पहुंचने का रास्ता न होने के कारण लोगों को नाले के गंदे पानी में इस परंपरा का निर्वाहन करना पड़ा। सावन माह में भुजरियां का विशेष महत्व है। पौराणिक मान्यता के अनुसार लोग नाग पंचमी के दिन खेतों से मिट्टी लाकर उसमें जौ के दाने बो देते हैं। रक्षाबंधन तक जौ के नन्हे पौधे लहलहाने लगते हैं। इनकी पूजा के बाद राखी बांधते हैं। इसके बाद मोहल्ले को लोग जमा होकर पास के तालाब में उन्हें जलदेवता को समर्पित कर देते हैं। जौ की पत्तियां बुजुर्गों को देने के साथ उनके पैर छूकर आशीर्वाद लेते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें