बीमार की मदद करते शाखा प्रबंधक।
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बैंकों में नोट बदलने और जमा करने की आपाधापी के बीच बैंक आफ इंडिया के मैनेजर और स्टाफ ने मिसाल पेश की। रिक्शे पर आए मरीज को कैश खत्म होने के बाद रुपये मुहैया कराए। उधर, शनिवार को भी पीएनबी व बैंक आफ इंडिया का कैश खत्म होने से सैकड़ों लोगों को बैरंग लौटना पड़ा। एसबीआई में नोट बदलने के लिए लगी भीड़ ने बैंक में काम धीमा होने का आरोप लगा हंगामा काटा। मौके पर पहुंची पुलिस ने लाठी पटककर भीड़ को नियंत्रित किया।
कस्बा स्थित बैंक आफ इंडिया में दोपहर बाद कैश खत्म हो जाने से कैश न होने का बोर्ड लगा दिया गया था। मोहल्ला किदवई नगर निवासी हबीब अहमद बीमारी के चलते इलाज कराने के लिए रिक्शे पर लेटकर अपने खाते से रुपये निकालने पहुंचे। कैश न होने की जानकारी पर उसे निराशा हाथ लगी। यह जानकारी जब बैंक मैनेजर सिद्धार्थ दुबे को हुई तब वह शाखा के बाहर निकलकर आए और अपने स्टाफ से छह हजार रुपये की व्यवस्था कराकर पीड़ित को इलाज के लिए दे दिए।
वहीं, पूर्व विधायक ताहिर हुसैन सिद्दीकी भी मौके पर आ गए, उन्होंने पीड़ित को इलाज के लिए आर्थिक मदद दी। उधर, तिर्वा रोड एसबीआई में कैश बदलने के लिए सुबह से ही लंबी लाइन लग गई। कई ग्राहकों ने आरोप लगाया कि बैंक के अंदर कार्य धीमा हो रहा था। जिस पर लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया। सूचना पर पहुंचे एसएसआई नवीन चंद्र ने लाठी पटककर लोगों को शांत किया और बिना लाइन में लगे लोगों को भगा दिया।