संवाद न्यूज एजेंसी
छिबरामऊ। शिक्षक भर्ती के मास्टरमाइंड पुष्पेंद्र ने सरदामई गांव की आरती जाटव की नौकरी लगवाने के एवज में परिवार वालों से दो लाख रुपये मांगे थे। रुपये न देने पर वह आरती का आधा मानदेय ले लेता था और उसके मूल दस्तावेज भी रख लिए। उसने आरती को शादी करने का आश्वासन भी दिया था। तीन महीने नगद मानदेय भी दिया लेकिन लॉकडाउन में पैसा मिलना बंद हो गया था।
विशुनगढ़ क्षेत्र के गांव सरदामई निवासी रामधनी पुत्र नरोतम जाटव ने बताया कि सात बेटियों में आरती चौथे नंबर की है। आरती उर्फ आकृति विशुनगढ़ के एक निजी विद्यालय में पढ़ाती थी। अक्टूबर 2019 में कुशलपुर गांव के ग्रामीण ने आरती की मुलाकात मैनपुरी जिले के ग्राम दीपक नगला निवासी शिक्षक पुष्पेंद्र से कराई। पुष्पेंद्र ने आरती की नौकरी लगवाने के बाद उससे शादी करने की बात कही। उसने नौकरी लगवाने के एवज में दो लाख रुपये भी मांगे लेकिन परिवार के लोगों ने रुपये देने में असमर्थता जताई। पुष्पेंद्र ने वेतन से रुपये काटने की बात कही, इस पर परिवार के लोग तैयार हो गए।
दिसंबर 2019 में पुष्पेंद्र आरती और उसके जीजा मुन्नालाल को अपने साथ लखनऊ ले गया। संविदा शिक्षक के तौर पर उसकी नौकरी लगवा दी। आरती परिजनों को बताए बिना अमेठी के कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में नौकरी करने लगी। वहां 21 से 25 हजार रुपये मानदेय मिलता है लेकिन पुष्पेंद्र ने आरती को तीन महीने तक कभी 10 तो कभी 12 हजार रुपये ही दिए। पुष्पेंद्र उसे नकद भुगतान करता था, कभी आरती के खाते में मानदेय नहीं आया। परिवार के लोगों ने बताया कि लॉकडाउन के बाद मानदेय नहीं मिला। पुलिस ने आरती की गिरफ्तारी की सूचना भी परिवार को नहीं दी है।
पुष्पेंद्र के पास हैं आरती के दस्तावेज
लखनऊ ले जाने से पहले पुष्पेंद्र ने आरती से उसके हाईस्कूल, इंटरमीडिएट, बीए के प्रमाणपत्र, आधारकार्ड, पैनकार्ड, बैंक पासबुक और फोटो लिए थे। ये दस्तावेज उसने अपने पास रख लिए थे। आरती के मांगने पर पुष्पेंद्र आज-कल देने की बात कहकर टकरा देता था।
बेटी की गिरफ्तारी से टूटी उम्मीदें
आरती की नौकरी लगने के बाद भूमिहीन पिता रामधनी जाटव उम्मीदें लगाए थे। आरती ने निजी स्कूल में शिक्षक कार्य शुरू कर पिता का हाथ बंटाना शुरू किया था। दिसंबर में उसकी नौकरी लगने पर अच्छा समय आने की आस जागी लेकिन अब उसकी गिरफ्तारी से परिजनों के सारे सपने बिखर गए हैं।