कन्नौज/तिर्वा। अपनी मांगें पूरी कराने के लिए कर्मचारियों ने एंबुलेंस का चक्का जाम कर दिया। हड़ताल का असर पहले दिन ही दिखने लगा। तमाम लोग अपने और किराये के वाहनों से अस्पताल पहुंचने को मजबूर हुए। पूरे दिन अव्यवस्था का माहौल रहा।
ठठिया थाना क्षेत्र के गांव रामनगर में रहने वाले रामसेवक की पत्नी राजवती को सांस लेने में दिक्कत हुई। पति ने एंबुलेंस को फोन किया। फोन तो उठा पर अभी बात कराने की बात कह कर काट दिया गया। ज्यादा दिक्कत होने पर वह ई-रिक्शा से पत्नी को लेकर मेडिकल कालेज पहुंचे। इन्हें 12 किलोमीटर का सफर चिंता में पूरा करना पड़ा। यह केवल रामवती की बात नहीं है। इस तरह के कई मरीज अस्पताल नहीं पहुंच सके। कई निजी वाहन लेकर पहुंचे। इन्हें मनमाना किराया वहन करना पड़ा। इसी तरह फैक्टरी में आग लगने से झुलसे जीतू यादव को एक घंटे तक जिला अस्पताल में एंबुलेंस के इंतजार में लेटे रहना पड़ा। निजी एंबुलेंस किराये पर की जाने लगी तो सीएमएस ने सांसद निधि की एंबुलेंस से कानपुर भेजा।
छह सूत्री मांगों को लेकर एंबुलेंस के चालकों और एमटी ने मेडिकल कालेज में धरना दिया। पूरे जिले की एंबुलेंस मेडिकल कालेज में खड़ी कर दीं। एंबुलेंस का चक्का जाम होने से मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलाई जा रहीं 102,108 एंबुलेंस चालकों ने 23 को सांकेतिक प्रदर्शन किया था। अब प्रदेश संगठन के आह्वान पर 26 जुलाई की सुबह पूरे जनपद में हड़ताल कर विरोध जताया। चालकों ने बताया कि जिस कंपनी के जरिए वह लोग काम कर रहे थे, सरकार ने उसका टेंडर निरस्त कर दूसरे को दे दिया। उन लोगों को नौकरी से बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा। मानदेय में कटौती की जानकारी मिली है। कोविड संक्रमण के दौरान लोग अपने घरों में रहना चाहते थे। तब एंबुलेंस के चालक व एमटी कोविड मरीजों को ढो रहे थे। अगर मांगें नहीं मानी गईं तो प्रदर्शन चलता रहेगा। इस मौके पर राहुल यादव, आदित्य यादव, आफताब, अंकित कटियार, आदेश, राजेंद्र सिंह, बृजेंद्र समेत अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।
कर्मचारियों की ये रहीं मांगें
एंबुलेंस कर्मचारियों की नौकरी ठेका प्रथा से बंद कर सीधे विभाग से जोड़ा जाए। ठेका प्रथा बंद करने के साथ ही एंबुलेंस कर्मचारियों की नौकरी सुरक्षित की जाए। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की एंबुलेंस टेंडर प्रक्रिया के आरएफपी में बदलाव किया जाए। समान कार्य के बदले समान वेतन लागू किया जाए। कोरोना काल में जिन एंबुलेंस कर्मचारियों की मौत हुई, उनके परिजनों को आर्थिक मदद दी जाए। साथ ही एंबुलेंस कर्मचारियों का पचास लाख का बीमा किया जाए।
पांच एंबुलेंस के सहारे चला काम
तिर्वा। जिले की सभी एंबुलेंस खड़ी होने से मरीजों को परेशानियों का सामना न करना पड़े, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने संगठन के प्रदेश अध्यक्ष हनुमान पांडेय से बात की। इसके बाद जिले को पांच एंबुलेंस दी गईं। इन्हें इमरजेंसी में चलाया गया। यह एंबुलेंस जिला अस्पताल, विनोद दीक्षित अस्पताल, तिर्वा मेडिकल कालेज व सीएचसी छिबरामऊ में लगी रहीं।