कन्नौज। निकाय चुनाव में समाजवादी पार्टी को जिले में मिली करारी हार पर आखिरकार कार्रवाई हो गई। प्रदेश अध्यक्ष ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए प्रदेश की जिला, विधानसभा और सभी प्रकोष्ठों की कार्यकारिणी भंग कर दीं। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल द्वारा रविवार को पार्टी से जुड़े जिले के सभी जनप्रतिनिधियों को जारी पत्र में इसकी पुष्टि की गई है। सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव का गढ़ होने के बाद भी पार्टी जिले में एक भी सीट जीतने में असफल साबित हुई थी।
पार्टी के लिए मुश्किलें टिकट वितरण के साथ ही शुरू हो गई थी। पार्टी ने कन्नौज, छिबरामऊ, गुरसहायगंज नगर पालिका के साथ ही तिर्वागंज, तालग्राम, समधन, सिकंदरपुर नगर पंचायत सीटों पर अपने अध्यक्ष पद के प्रत्याशी उतारे थे। सौरिख नगरपंचायत सीट पार्टी ने छोड़ दी थी। इन सात सीटों पर पार्टी ने जीत के दावे भी किए थे और मजबूत उम्मीदवार मैदान में उतारने की बात कही जा रही थी। लेकिन एक दिसंबर को निकाय चुनाव के परिणाम सामने आने के बाद पार्टी पदाधिकारी और उम्मीदवारों के सारे दावे धराशायी हो गई।
पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा और उसे एक भी सीट पर जीत हासिल नहीं हुई। कन्नौज, गुरसहायगंज, छिबरामऊ नगर पालिका सीटों के अलावा, समधन, तालग्राम, तिर्वा नगर पंचायत सीटों पर उतारे गए उम्मीदवारों की जमानत तक जब्त हो गई। सपा सुप्रीमो के गढ़ में पार्टी की इतनी करारी हार को कोई भी गले नहीं उतार पाया। परिणाम आने के बाद से ही कयास लगने लगे थे कि हाईकमान बड़ी कार्रवाई करेगा और उसने ऐसा किया भी। रविवार को पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल ने कन्नौज की जिला, विधानसभा और सभी प्रकोष्ठों की कार्यकारिणी तत्काल प्रभाव से भंग कर दी।
बागियों को दिखाया जा सकता है बाहर का रास्ता
कन्नौज। जिला व अन्य कार्यकारिणी पर कार्रवाई के बाद पार्टी हाईकमान बागियों पर कार्रवाई की तैयारी में है। पार्टी सूत्रों की माने तो किस सीट पर किसने बागी होकर पार्टी प्रत्याशी का खेल बिगाड़ा था, इसकी जानकारी हाईकमान तक पहुंच गई है। अब इन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है।
भाजपा में भी सुगबुगाहट शुरू
कन्नौज। समाजवादी पार्टी के बाद अब भाजपा के अगले कदम पर सभी की निगाहें टिक गई हैं। भाजपा ने आठ निकायों में से सात पर अपने प्रत्याशी उतारे थे। सिकंदरपुर सीट पार्टी ने छोड़ दी थी। हालांकि पिछले चुनाव की अपेक्षा उसे जिले में एक सीट का फायदा हुआ लेकिन हाईकमान इसे पर्याप्त नहीं मान रहा है। नगर पालिका कन्नौज की सीट पार्टी के लिए प्रतिष्ठा वाली थी। 2012 के निकाय चुनाव में भाजपा ने ही इस सीट पर कब्जा जमाया था। यह सीट ऐसे समय पार्टी ने जीती थी, जब जिले में सपा का दबदबा था। ऐसे में माना जा रहा था कि जब देश और प्रदेश में जब भाजपा की सरकार है तो पार्टी सात में से सात सीटें जीतकर आएगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। भाजपा छिबरामऊ और सौरिख सीट ही जीत सकी। कन्नौज नगर पालिका सीट पर पार्टी प्रत्याशी की जमानत तक जब्त हो गई। यही हाल समधन, तालग्राम और तिर्वा नगर पंचायत सीट का भी रहा। इन सीटों पर उतारे गए पार्टी प्रत्याशी भी अपनी जमानत नहीं बचा सके। ऐसे में माना जा रहा है कि भाजपा हाईकमान भी जिले के पदाधिकारियों से खासा नाराज है और जल्द कोई निर्णय सामने आ सकता है।
पार्टी अध्यक्ष की कार्रवाई की जानकारी नहीं
सपा प्रदेश अध्यक्ष ने क्या कार्रवाई की है, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। उन्हें अभी कोई पत्र प्रदेश संगठन की ओर से प्राप्त नहीं हुआ है।
मजहारुल हक उर्फ मुन्ना दरोगा, सपा जिलाध्यक्ष, कन्नौज।