फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बीज उपचारित कर करें मटर की बोआई

विज्ञापन
विज्ञापन
कन्नौज। मटर की खेती के लिए दोमट और हल्की दोमट मिट्टी अधिक उपयोगी होती है। खेत की पहली जोताई हैरो फिर दो से तीन जोताई कल्टीवेटर से करें। इसके बाद उपचारित बीज से बुआई करें। प्रति हेक्टेयर 80 से 100 किलो तक बीज की जरुरत होती है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. वीके कनौजिया ने बताया कि बीज का थीरम दो ग्राम मैकोंजेब तीन ग्राम प्रति किलो के हिसाब से शोधन करना चाहिए। अगेती फसल के लिए चौबीस घंटे पहले बीज भिगोएं फिर छाया में सुखाकर बुआई करें। प्रति हेक्टेयर 20 टन गोबर की खाद, 25 किलोग्राम नाइट्रोजन, 50-70 किलोग्राम फास्फोरस और 50 किलोग्राम पोटाश डालना चाहिए। फसल की पहली सिंचाई फूल आते समय और दूसरी फलियां बनते समय करनी चाहिए। फलियां 10 दिनों के अंतर पर 3-4 बार तोड़ाई करनी चाहिए।
विज्ञापन

बुआई के दो दिन बाद खेत में 3.3 लीटर पेडीमेथीलीन 30 ईसी 600-800 लीटर पानी में घोल का प्रति हेक्टेयर के हिसाब से छिड़काव करना चाहिए। 2.25 लीटर वासालीन को 1000 लीटर पानी में घोल कर भी छिड़काव कर सकते हैं। बोआई के 25-30 दिनों बाद निराई गुड़ाई करने से जड़ों को हवा मिल जाती है।
कन्नौज। जिला उद्यान अधिकारी मनोज चतुर्वेदी ने बताया कि जिले के किसान सबसे अधिक आलू की पैदावार करते हैं। किसानो को काफी जागरुक किया गया है। इस बार मटर फसल के लिए दो हजार हेक्टेयर का लक्ष्य है। किसानो को प्रेरित करते हुए बताया जा रहा कि दूसरी फसलों को करने से अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें