तालग्राम। अमोलर विशोखर धाम आश्रम की 50 बीघा भूमि पर 27 ग्रह नक्षत्रों और 12 राशियों को साधने के लिए एक विशेष वाटिका तैयार हो रही है। इस बगिया में पूजन को अधिक फलदायी बनाने हेतु जरूरी फूल और पौधे लहलहा रहे हैं। यह वाटिका दुर्लभ प्रजाति के पुष्प, पत्ते और टहनियां उपलब्ध कराती है।
बाबा सीताराम महाराज और उनके शिष्यों ने इस अनूठी बगिया को विकसित किया है। बाबा आशुतोष महाराज बताते हैं कि पंडित और पुरोहित अक्सर खास तरह के फूल-पत्तियां बताते हैं। ये पौधे आम आदमी को आसानी से नहीं मिलते और नई पीढ़ी उन्हें पहचानती भी नहीं है। वर्ष 2019 से आश्रम परिसर में दुर्लभ प्रजाति के पौधे लगाए गए। इस बगिया में 2000 से अधिक फल-फूल वाले पेड़-पौधे लगे हैं।
पूजन के साथ उपचार में इस्तेमाल होने वाले पौधों की किस्में भी यहां हैं। जरूरतमंदों को पूजन के लिए पुष्प-पत्तियां और इलाज के लिए पौधे निशुल्क दिए जाते हैं। यह सब सेवाभाव के तहत उपलब्ध कराया जाता है। बाबा को बचपन से पेड़-पौधों से प्रेम था। उनकी दिनचर्या पौधों की देखरेख से शुरू होती है। दूसरों की जरूरत पूरी होते देख उन्हें आत्मिक तसल्ली मिलती है। संवाद
वाटिका में मिलते अलग-अलग राशि व नक्षत्रों के पूजन के पेड़-पौधे और पुष्प
देवादास महाराज और बाबा मुंडन हरिसिंह दास ने बताया कि वाटिका में 27 नक्षत्रों के पूजन के लिए अलग-अलग पौधे और पुष्प हैं। भरणी नक्षत्र के लिए आंवला, कृतिका के लिए सात तरह का गुड़हल, रोहिणी के लिए जामुन, आद्रा के लिए शीशम, पुनर्वसु के लिए बांस, पुष्य के लिए पीपल, अश्लेखा के लिए नागकेसर, मघा के लिए वट, पूर्वा के लिए पलाश, उत्तरा के लिए पाकड़, हस्त के लिए रीठा, चित्रा के लिए बेल और स्वाति के लिए अर्जुन के पौधे हैं। इसके अतिरिक्त आम, कटैया, महुआ, चीड़, अशोक, कटहल, कदम, कैथा, बेर, मदार, गूलर, चंदन जैसे कई अन्य पौधे भी उपलब्ध हैं। ये सभी पौधे ग्रह नक्षत्रों और राशियों को अनुकूल करने की आराधना में सहायक होते हैं।
फोटो :17: वाटिका में गुड़हल पुष्प दिखाते बाबा आशुतोष महाराज। संवाद