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मानसून की मेहरबानी से धान किसानों के चेहरे खिले

Mon, 16 Jul 2012 12:00 PM IST
Kannauj
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कन्नौज। इसे कहते हैं देर आए, दुरुस्त आए। काफी लंबे इंतजार के बाद काले मेघा जब आकाश में उमड़े तो झमाझम बारिश ने अपने आने की दस्तक दी। मानसून की मेहरबानी से जहां आम आदमी को गर्मी से काफी राहत मिली। वहीं सूखा पड़ने की आशंका के चलते उदास किसानों के चेहरों पर मुस्कान लौट आयी। जमकर बारिश होने से किसानों ने अपने खेतों में धान की रोपाई का काम तेज कर दिया है। किसानों की मानें झमाझम बारिश के चलते जल्द ही उनके खेतों में धान की फसल लहराएगी।
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मालूम हो कि जून माह में मानसून आने से किसान खरीफ की फसलों की बुवाई शुरू कर देते हैं। इसमें मक्का, धान, बाजरा, अरहर की फसलें प्रमुख रूप से बोई जाती हैं। इस बार जून माह में बारिश न होने से सूखा पड़ने की आशंका से किसान चिंतित थे। लेकिन विगत 4 जुलाई की देररात हुए बूंदाबांदी के बाद से जारी बादलों की जुगलबंदी से किसान काफी खुश हैं। गांव मेंहदीपुर निवासी किसान राजेंद्र कुमार का कहना है कि आए दिन हो रही बारिश से धान की फसल की उपज अच्छी मिलने की उम्मीद है। वहीं मौसम में नमी के चलते रोपी गयी धान की पौध में दीमक व अन्य कीटों का प्रकोप अपना असर नहीं दिखा पा रहा है। यही मौसम रहा तो जल्द ही खेतों में धान की फसल लहलहाती नजर आएगी। गांव मानपुर निवासी किसान राजेश कटियार का कहना है कि मानसून के देर से आने के बावजूद अच्छी बारिश होने से धान की फसल पर कोई प्रभाव नहीं पड़ने की उम्मीद है। नर्सरी में सूख रही धान की पौध को किसान अब अपने खेतों में रोपने में रूचि ले रहे हैं। गांव जसौली निवासी शमशाद खां का कहना है कि आलू किसान बड़े पैमाने पर धान की फसल की बुवाई करते हैं। इस फसल से खेतों में खरपतवारों पर अंकुश लगता है। इसके बाद आलू या गेंहू की फसल की जा सकती हैं।
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