कन्नौज। गंगा को सीवर के दूषित पानी से बचाने के लिए जलालपुर अमरा गांव में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने का रास्ता साफ हो गया है। करीब तीन साल से चल रहा भूमि विवाद समाप्त करने में जिला प्रशासन को सफलता मिल गई है। जल निगम ने अब एसटीपी निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया पूर्ण करके इसे बनाने की कवायद शुरू कर दी है। छह महीने के अंदर एसपीटी बनाकर तैयार कर देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने के लिए 49.64 एकड़ भूमि सदर ब्लाक की ग्राम पंचायत जलालपुर अमरा में चिह्नित की गई थी। वर्ष 2009 में इस भूमि को चिन्हित किया गया था। इसके बाद किसानों ने धरना प्रदर्शन और आंदोलन शुरू कर दिया। बीते तीन सालों से जमीन संबंधी विवाद हाईकोर्ट में चल रहा था। हाल ही में किसानों को जिला प्रशासन ने मनाया। तहसीलदार सदर राजेश कुमार ने बताया कि लेखपाल को भेजकर स्थल की पैमाइश करा दी गई है। सीमांकन के बाद भूमि को जल निगम निर्माण खंड के हवाले कर दिया गया है। अमल दरामद कराकर खतौनी भी सौंप दी गई है।
जल निगम निर्माण खंड के अधिशासी अभियंता कार्यालय के अनुसार टेंडर प्रक्रिया पूर्ण करके जल्द से जल्द प्लांट बनाने की औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएंगी। छह महीने के अंदर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाकर तैयार कर दिया जाएगा। पहले यह प्लांट 12 एमएलडी का बनना था। अब एक एमएलडी क्षमता बढ़ा दी गई है। एसटीपी के लिए बजट उपलब्ध है। एसटीपी बनने के बाद शहर में दो फेज में बन रही सीवर लाइन को भी चालू करा दिया जाएगा। डीएम अनुज कुमार झा का कहना है कि सीवर लाइन योजना पर प्रशासन पूरी मानीटरिंग कर रहा है। जल निगम के अभियंताओं को निर्देश दिए गए हैं कि वे एसटीपी को बनवाने का काम समय से पूरा करें। यह योजना गंगा के प्रदूषण से जुड़ी है। इसलिए इसे प्राथमिकता देकर पूरा कराएं। जल निगम के एक्सईएन भीमसेन का कहना है कि एसटीपी बनते ही सीवर लाइन चालू हो जाएगी। जो ब्लाक बन गए हैं उनको चालू कर दिया जाएगा, ताकि योजना का लाभ जनता को मिलने लगे।
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..तो पाटा नाला नहीं करेगा गंगा को गंदा
मौजूदा समय में शहर के बीचोबीच से निकले पाटा नाला के जरिए सीवेज की गंदगी सीधे गंगा में गिरती है। सीवर लाइन चालू होने के बाद सीवेज की गंदगी एसटीपी तक पहुंचेगी। यहां दूषित पानी शोधित होने के बाद सीवेज ट्रीटेमेंट प्लांट से निकलने वाला पानी खेतों की सिंचाई के काम में आएगा।
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एक नजर में सीवर लाइन योजना
सीवर लाइन योजना फेज वन को 1 मार्च 2006 को स्वीकृति मिली थी। तब 12 करोड़ 29 लाख 35 हजार रुपये लागत थी। 30 अप्रैल 2011 को काम पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था पर ऐसा हुआ नहीं। निर्धारित समय सीमा के बाद 42 महीने बीत चुके हैं, लेकिन काम अधूरा पड़ा है। नतीजतन लागत बढ़कर 23 करोड़ 12 लाख 53 हजार पर पहुंच गई है।
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सीवर लाइन योजना फेज टू
ॎ सीवर लाइन योजना फेज टू को 24 फरवरी 2011 में मंजूरी मिली थी। 43 करोड़ 66 लाख रुपये की क ार्ययोजना स्वीकृत हुई थी। 31 अगस्त 2012 तक यह प्रोजेक्ट पूरा होना था, लेकिन यह भी लेटलतीफी का शिकार हो गया। दो साल बाद भी काम अधूरा पड़ा है। जल निगम निर्माण खंड की माने तो बजट आवंटन में विलंब के कारण देरी हो रही है।