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दो लाख लोगों की प्यास बुझाने को 34 करोड़

Sat, 08 Nov 2014 05:30 AM IST
Kannauj
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कन्नौज। करीब छह महीने से चल रहा इंतजार खत्म हुआ। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के दखल के बाद जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में पानी का संकट को दूर करने के लिए 68 करोड़ 9 लाख 88 हजार रुपये की योजनाओं को हरी झंडी मिल गई है। प्रदेश सरकार ने ग्रामीण जनता को शुद्ध पेयजल मुहैया कराने के सपने को साकार करने के लिए पहली किश्त के रूप में 34 करोड़ 4 लाख 94 हजार रुपये का बजट आवंटित कर दिया है।
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प्रदेश के विशेष सचिव अबरार अहमद ने जिलाधिकारी अनुज कुमार झा को पत्र भेजकर बजट आवंटन की जानकारी दी है। यह धनराशि त्वरित आर्थिक विकास योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2014-15 के तहत मिली है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की 16 टंकियों का निर्माण कराया जाएगा। इसके बाद गांव की गलियों में पाइप लाइन बिछाई जाएंगी। मेन राइजिंग लाइन को पाइप लाइनों से जोड़ने के बाद लोगों के घरों तक टोटियों के जरिए पानी पहुंचाया जाएगा। जल निगम के अधिशासी अभियंता राजेंद्र सिंह ने बताया विभाग ने पूरी तैयारी कर रखी है। जल्द टंकियों का निर्माण शुरु करा दिया जाएगा। टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उम्मीद है 10 दिसंबर से निर्माण शुरू हो जाएगा। टंकियों का निर्माण पूरा होने के बाद गांव वालों को पानी का कनेक्शन दिया जाएगा। कुछ महीनों तक जल निगम टंकी का संचालन करेगा। संतुष्ट होने के बाद टंकी को ग्राम सभा के हवाले कर दिया जाएगा। इसके बाद प्रधान की देखरेख में टंकी से जलापूर्ति व्यवस्था संचालित की जाएगी। टंकी चलाने के लिए ग्राम सभा के स्तर से दो हजार रुपये मासिक मानदेय के आधार पर आपरेटर की नियुक्ति की जाएगी। इससे गांव के 16 बेरोजगार लोगों को रोजगार का अवसर भी अपने ही गांव में मिल सकेगा।
जिलाधिकारी ने विशेष सचिव के पत्र को मुख्य विकास अधिकारी उदयराज यादव के पास भेज दिया है। सीडीओ को निर्देश दिए गए हैं वह अपनी देखरेख में गुणवत्तापूर्ण ढंग से टंकी बनवाने के साथ हैंडपंप
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लगवाएं। परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के लिए भी राहत भरी खबर है। त्वरित आर्थिक विकास योजना के तहत चालू वित्तीय वर्ष में धन आवंटन होने से स्कूलों को खराब हैंडपंपों को रिबोर कराया जा सकेगा, जबकि जहां नल नहीं हैं वहां नया हैंडपंप स्थापित हो सकेगा। जल निगम के अनुसार ग्रामीण अंचल में स्थित प्राइमरी पाठशाला, जूनियर हाईस्कूल में हैंडपंप लगाने व खराब हैंडपंपों को रिबोर करने के लिए 32 लाख 15 हजार रुपये की कार्ययोजना भेजी गई थी। स्टीमेट के सापेक्ष पहली किश्त में सरकार ने 16 लाख 8 हजार रुपये आवंटित किया है। इसलिए इसी महीने के अंत तक स्कूलों के हैंडपंप ठीक कराकर पेयजल समस्या का समाधान कराने का काम शुरू कर दिया जाएगा।ग्राम पंचायतों में नए हैंडपंप लगाने की योजना भी अब पूरी हो सकेगी। जल निगम ने इस वर्ष 1525 नए हैंडपंप लगाने के लिए स्टीमेट भेजा था। इसके लिए 7 करोड़ 75 लाख 98 हजार रुपये चाहिए। इसके सापेक्ष पहली किश्त में शासन ने 3 करोड़ 87 लाख 99 हजार रुपये का बजट रिलीज कर दिया है।
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