मृदा जीर्णोद्धार कार्यक्रम का उमर्दा ब्लाक में असर
मृदा परीक्षण के लिए लिए थे 1602 नमूने
10 से 15 फीसदी तक पैदावार में बढ़ोत्तरी
योगेंद्र बघेल
कन्नौज। उमर्दा विकास खंड में शासन से चयनित 26 ग्रामों में इफ्को ने मृदा जीर्णोद्धार एवं उत्पादकता वृद्धि परियोजना चलाई। इस परियोजना से रासायनिक खादों के प्रयोग से बर्बाद हो चुकी भूमि को सुधारकर 10 से 15 प्रतिशत उत्पादन में वृद्धि हुई है।
इफ्को के डिप्टी ऐरिया मैनेजर ने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष में एक करोड़ की धनराशि स्वीकृति हुई थी। वर्ष 2014-15 के लिए 88 लाख का बजट प्रस्तावित है। परियोजना के तहत 26 गांवों में मृदा परीक्षण प्रयोगशाला के माध्यम से गांव-गांव जाकर 1602 मिट्टी के नमूने लिए गए। 1413 नमूनों को इलाहाबाद प्रयोगशाला भेजा गया। 230 नमूनों की सूक्ष्म तत्वों की रिपोर्ट से किसानों को अवगत कराया गया। वर्ष 2013-14 में 400 कुंतल ढैंचा बीज 1498 किसानों को वितरित हुआ। बीते वित्तीय वर्ष में 500 कुंतल ढैंचा बीज 1570 किसानों में वितरित किया गया है। वहीं 1250 लीटर जैव उर्वरक वितरित किया गया। इससे आलू, धान, गेहूं का लगभग 625 हेक्टेयर क्षेत्रफल में प्रयोग हुआ है। इससे 10 से 15 प्रतिशत उत्पादन वृद्धि हुई है।
बताया धान, गेहूं की फसल ने भूमि को कमजोर बना दिया है। यह अन्नावली फसलें हैं, जिनकी खुराक ज्यादा मात्रा में शोषित होने से भूमि कमजोर होती जा रही है। दलहनी फसलें ही इस कमजोरी को दूर कर सकती है। इसी के तहत अरहर का 400 किलोग्राम ब्रीडर बीज भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान कानपुर से लाकर 196 किसानों को वितरित किया गया। रवी सीजन में 20 किलो चना, 4 किलो. मटर, 2 किलो मसूर, 9 किलो सरसों का प्रमाणिक बीज 924 किसानों को वितरित किया गया। इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति में वृद्धि के साथ-साथ उत्पादन में वृद्धि होगी।
किसानों को दी आर्थिक मजबूती
कन्नौज। किसानों को आर्थिक रुप से संपन्न बनाए जाने के लिए 350 किसानों को सब्जी का उत्पादन कराया गया। गाजर, धनिया, मूली, गोभी, टमाटर, बैंगन, मिर्च, प्याज, आलू, भिंडी, करेला, लौकी आदि का बीज किसानों को उपलब्ध कराया गया। इससे भोजन की पौष्टिकता के साथ आय में वृद्धि हुई। साथ ही 1000 दशहरी, 50 आम्रपाली, 500 चौसा, 750 अमरुद, 250 बेल, 500 आंवला, 250 नीबू 50 जामुन के पौधे रोपित किए गए।
तीन वर्ष तक चलेगी परियोजना
कन्नौज। परियोजना के कोआर्डिनेटर राजेंद्र सिंह यादव ने बताया कि परियोजना में उमर्दा विकास खंड नुनारी, चिंतापुर्वा, सिकरौरी, खरगापुर, सिमुआपुर, थम्मनपुर्वा, भदौसी, प्रतापपुर, ऐमा, पहाड़ीपुर, गंगापुर्वा, रहमतपुर, भगवानपुर, नदईपुर्वा, जोतपुर्वा, पनिकापुर्वा, गुनाहा, हिम्मतपुर, हरेईपुर, दैलेपुर्वा, खुशलापुर्वा, वौरापुर, आनंदीपुर्वा का चयन हुआ है। यह परियोजना अगले तीन वर्ष तक चलेगी।
किसानों को होने वाले मुख्य लाभ
- मृदा स्वास्थ्य में सुधार कर उर्वरा शक्ति में वृद्धि करना
- फसल उत्पादन में वृद्धि कराकर कृषकों की आय में वृद्धि करना
- कृषि विविधीकरण के प्रति किसानों में रुझान लाकर आर्थिक समृद्धि करना
परियोजना के तहत ये होंगे काम
- पौधों के प्रमुख एवं सूक्ष्म तत्वों हेतु मिट्टी की जांच करना
- हरी खाद प्रयोग (ढैंचा की हरी खाद)
- जिप्सम, जैव उर्वरक का प्रयोग
- तिलहनी फसलों की खेती को बढ़ावा देना
- संतुलित उर्वरक प्रयोग हेतु फसल प्रदर्शन करना
कंपोस्ट खाद तैयार करना, बीज उत्पादन करना, कृषि उपकरण उपलब्ध कराना
-पौधरोपण केला खेती, सब्जी की खेती, फूल एवं औषधीय खेती
- पशु चिकित्सा शिविर लगाना व टीकाकरण कराना
- पशु नस्ल सुधार हेतु कृत्रिम गर्भादान के लिए आर्थिक मदद देना
- तालाबों का जीर्णोद्धार कराना, सिंचाई पाइप उपलब्ध कराना, ड्रिप सिंचाई व फुब्बारा सिंचाई का विकास करना
- मानव विकास परीक्षण कार्यक्रम, स्वरोजगार हेतु महिला प्रशिक्षण तथा सिलाई-कढ़ाई, आचार मुरब्बा आदि बनाना, मोतियाबिंद आपरेशन के लिए शिविर का आयोजन