कन्नौज। आठ विकास खंडों में बंटे इस जनपद में 441 ग्राम पंचायतें हैं। इसमें से बीते वित्तीय वर्ष में 17 और चालू वित्तीय वर्ष में 22 ग्राम पंचायतें लोहिया गांव के तौर पर चयनित की गई थी। शेष गांवों की गिनती सामान्य गांवों के रूप में हैं। जिला प्रशासन का सारा फोकस लोहिया गांवों पर है। सरकार की प्रमुख प्राथमिकता वाली महत्वाकांक्षी लोहिया आवास योजना सामान्य गांवों के लिए बेमतलब साबित हो रही है।
विकास भवन की फाइलों में दर्ज सरकारी आंकड़ों को ही सच मानें तो वित्तीय वर्ष 2012-13 में लोहिया आवास योजना जोरशोर से शुरु की गई। ब्लाक की मीटिंगों से लेकर गांव की खुली बैठकों तक में इसका खूब प्रचार कराया गया। इससे उन गरीबों को आवास मिलने की उम्मीद जागी जिनके नाम बीपीएल कार्य नहीं है या जिनका नाम बीपीएल कार्ड की सूची में नहीं हैं। योजना शुरू हुए करीब डेढ़ साल बीत गए, लेकिन सामान्य गांवों की जनता को फूटी कौड़ी तक नहीं मिली। इससे आशा की जगह अब निराशा व्याप्त हो गई है।
डीआरडीए के आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2012-13 में जनपद के गैर लोहिया गांवों के लिए मात्र 53 आवास ही स्वीकृत हुए। इसके लिए बजट भी आ गया, लेकिन लाभार्थियों का चयन वित्तीय वर्ष समाप्त होने के छह महीने और बीत जाने के बाद भी नहीं हो सका। सूत्रों की मानें तो बीते वर्ष हजारों की तादात में ऐसे लोग निकलकर सामने आए जो लोहिया आवास के लिए पात्रता पूरी करते थे, लेकिन शासन से मिले बजट व लक्ष्य की मात्रा ऊंट के मुंह में जीरा के कारण योजना ठंडी पड़ गई। वरीयता क्रम के आधार पर लाभार्थियों का चयन कर पाने में पता नहीं क्यों खंड विकास अधिकारियों व विकास भवन के अफसरों को पसीना छूट रहा है। नतीजन लाभार्थी चयन पूर्ण नहीं हो रहा है। सर्वेक्षण रिपोर्ट का भी अता पता नहीं है।
वहीं मौजूदा वित्तीय वर्ष 2013-14 में जिले भर के करीब 400 गैर लोहिया गांवों में कितने लोहिया आवास बनेंगे, इसके लिए कोई लक्ष्य ही प्राप्त नहीं हुआ है। न ही कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश मिल सके हैं। इस योजना को लेकर फिलहाल अधिकारी मौन हैं। इस साल की कोई सर्वेक्षण रिपोर्ट भी अब तक नहीं आ सकी है। एक बीडीओ ने नाम छापने की शर्त पर बताया कि लोहिया आवास योजना ने परेशान करके रखा है। रोजाना दफ्तर में व गांव में भ्रमण करने जाने पर लोग यही पूछते हैं कि लोहिया आवास योजना की पहली किश्त कब मिलेगी ? इस संबंध में विभागीय अधिकारी बीते वर्ष के 53 लाभार्थियों का चयन कर खाते में रुपया भेजने की बात कह रहे हैं।
मौजूदा वित्तीय वर्ष में लोहिया गांवों में 206 सामान्य वर्ग के लाभार्थियों और 46 अनुसूचित जाति के लाभार्थियों को लोहिया आवास बनाने के लिए पहली किश्त दी जा चुकी है। निर्माण कार्य चल भी रहा है। अधिकारी भी दौरा करके इन आवासों के निर्माण की प्रगति परख रहे हैं। नोडल अफसरों की भी तैनाती कर दी गई है, जो अन्य विकास योजनाओं के साथ ही लोहिया आवास योजना का हालचाल ले रहे हैं।
डा. राम मनोहर लोहिया समग्र गांव इंदिरा आवास योजना में भी हावी हैं। मौजूदा वित्तीय वर्ष में इंदिरा आवास योजना के तहत केंद्रांश के रूप में करीब एक करोड़ नौ लाख रुपया का बजट मिल चुका है। इससे करीब ढाई सौ लाभार्थियों को पहली किश्त के तौर पर 70-70 हजार रुपया भेजा गया है। खास बात यह है कि ये सारे लाभार्थी लोहिया गांवों के हैं। यानि मौजूदा समय में चालू वित्तीय वर्ष में इंदिरा आवास योजना मे भी गैर लोहिया गांव के एक भी लाभार्थी को धनराशि नहीं मिल सकी है। उन्हें यह कहकर इंतजार करने की सलाह दी जा रही है कि पहले लोहिया गांवों को संतृप्त किया जाएगा। लोहिया गांव के समस्त चिह्नित लाभार्थियों के लिए बजट भेजे जाने के बाद जब धनराशि बचेगी जब गैर लोहिया गांवों की बारी आएगी।
गैर लोहिया गांव के लोगों को लोहिया आवास योजना का लाभ दिलाने के लिए जनप्रतिनिधि गंभीरता से प्रयास नहीं कर रहे हैं। जनता जब आवास की मांग करती है तो जनप्रतिनिधि सिफारिशी चिट्ठी लिखकर उनकी सहानुभूति बटोर लेते हैं। अधिकारी से भी पैरवी करते हैं, लेकिन बजट आवंटन के लिए पता नहीं क्यों पैरवी नहीं कर रहे। लोहिया आवास मांगने वालों की फेहरिस्त बढ़ती जा रही है, वहीं गरीबों को आवास देने संबंधी नेताओं की चिट्ठी की भी लाइन लगी है। लेकिन शासन स्तर पर प्रयास करके गैर लोहिया गांवों के लिए बजट आवंटन कराने व पात्रों का चयन कराकर आवास निर्माण शुरु कराने की ठोस पहल नेता नहीं कर रहे। इसीलिए योजना जमीन पर शुरु होने में कितना वक्त लगेगा, इसका जवाब कोई नहीं दे रहा ?