कन्नौज। जिले में पड़ रही कड़ाके की सर्दी से अस्पताल में सर्दी-जुकाम के मरीजों की संख्या में अचानक से इजाफा देखने को मिल रहा है। जिला अस्पताल में सुबह से दोपहर तक भीड़ लगी रही है। इनमें सबसे अधिक सर्दी-जुकाम और बुखार के मरीज हैं। वहीं कोहरा इतना अधिक था कि दृश्यता लगभग शून्य पर पहुंच गई। सर्दी दूर करने को लोग अलाव का सहारा लेते नजर आए। दोपहर करीब एक बजे जब धूप निकली तो वाहनों ने रफ्तार पकड़ी। चिकित्सकों ने भी सांस, बीपी व हार्ट के मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।
कोहरे के चलते सोमवार को ट्रेनें भी प्रभावित रही। कालिंदी एक्सप्रेस जहां करीब चार घंटे तो छपरा-मथुरा एक्सप्रेस अपने तय समय से करीब पांच घंटे देरी से पहुंची। वहीं, सोमवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की लंबी कतार देखी गई। जिला अस्पताल के सभी ओपीडी कक्षों में एक हजार से अधिक की ओपीडी रोजाना हो रही है। डाक्टरों की मानें तो इस समय कोल्ड वायरल, सर्दी-खांसी के मरीज सबसे अधिक पहुंच रहे हैं। डाक्टर के मुताबिक सर्दियों का मौसम सांस के मरीजों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। सांस संबंधी जैसे दमा, फ्लू और सर्दी-जुकाम के मरीजों की संख्या काफी बढ़ रही है। इस वजह से लोगों की आंखों में जलन, नाक में खुजली, गले में खराश और खांसी जैसे लक्षण सामान्य तौर पर देखने को मिल रहे हैं। सोमवार को अधिकतम तापमान 19.3 और न्यूनतम 9.1 डिग्री दर्ज किया गया है। बाल रोग विशेषज्ञ डा. पीएम यादव ने बताया कि सर्दी बढ़ने के साथ बच्चों में एलर्जिक ब्रोंकाइटिस की शिकायत बढ़ने लगी है। ऐसी मरीजों की संख्या ओपीडी में 30 प्रतिशत तक बढ़ गई है। इस मौसम में इंफेक्शन का खतरा कम होता है, लेकिन एलर्जी की शिकायत बढ़ जाती है। बच्चों को गर्म कपड़े पहना कर रखें और सुबह शाम बाहर निकलने से बचें। फिजीशियन डा. वीके शुक्ला ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में अस्थमा के मरीजों की संख्या बढ़ी है। 20 प्रतिशत तक मरीज ओपीडी में बढ़ गए हैं। अस्थमा के अटैक के दौरान वायु मार्ग के आसपास के मसल्स में कसाव और वायु मार्ग में सूजन आ जाती है। जिससे हवा का आवागमन अच्छी तरह से हो नहीं पाता है। सांस के रोगियों के लिए जरूरी है कि वे दवाएं समय पर लें। इनहेलर अपने पास रखें। धूल और कोहरे में निकलने से बचें। कोई दिक्कत होने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें। वहीं चिकित्सक आरके साहू अनुसार, ठंड के कारण खून की नसे सिकुड़ती हैं, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है। साथ ही खून भी गाढ़ा होता है। इसके कारण हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है।