कन्नौज। अब यह लापरवाही सिस्टम की है या फिर अभिभावकों की। भुगतना अतिकुपोषित बच्चों को पड़ रहा है। अतिकुपोषित बच्चों को पोषित करने के लिए जिला अस्पताल में 10 पलंग का एनआरसी बना हुआ है। जिले में 548 बच्चे अतिकुपोषित हैं, लेकिन एनआरसी में भर्ती सिर्फ तीन बच्चे ही हैं।
यह आलम तब है, जब अभिभावकों को बच्चों को एनआरसी में भर्ती कराने के लिए 50 रुपये प्रतिदिन दिए जाते हैं। जिले में कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चों को चिह्नित करने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और आरबीएसके की टीम लगाई गई है। इनकी रिपोर्ट के बाद बच्चों को जिला अस्पताल में संचालित एनआरसी में भेजा जाता है।
14 से 28 दिनों तक भर्ती रखे जाते अतिकुपोषित बच्चे
डीपीओ राजेश वर्मा ने बताया कि एनआरसी में बच्चों को कम से कम 14 और अधिक से अधिक 28 दिनों तक भर्ती किया जाता है। बच्चे के पोषित होने पर अभिभावक को 50 रुपये प्रतिदिन के दिए जाते हैं। साथ ही मां को साड़ी और बच्चे को खिलौने दिए जाते हैं।
अभिभावक एनआरसी जाने को नहीं होते तैयार
बच्चों के कुपोषित होने के बावजूद कई बार अभिभावक एनआरसी में ले जाने को तैयार नहीं होते हैं। इस बारे में डीपीओ ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की ओर से जिन बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया जाता है, उनमें से कई बार अभिभावक अपने बच्चों को पहले ही लेकर चले आते हैं। ऐसे में एनआरसी वाले उसे शून्य दर्शा देते हैं, जिससे आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की मेहनत पर पानी फिर जाता है।