उमर्दा। सब्जियों की खेती करने वाले किसानों के लिए उद्यान विभाग का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर वेजिटेबल नई उम्मीद बनकर उभरा है। आधुनिक संरक्षित खेती तकनीक से यहां गुणवत्तायुक्त और रोगमुक्त सब्जियों की पौध तैयार की जा रही है। वर्तमान में केंद्र पर 3.50 लाख पौध तैयार हो रही हैं। इसकी मांग क्षेत्र के अलावा आसपास के कई जिलों के किसानों में लगातार बढ़ रही है।
जिला उद्यान अधिकारी आशीष कुमार ने बताया कि सेंटर पर नियंत्रित एवं कीटमुक्त वातावरण में तैयार पौध की गुणवत्ता बेहतर होने के साथ ही इनमें एकसमान वृद्धि होती है। यही वजह है कि क्षेत्र के साथ कानपुर नगर, कानपुर देहात, इटावा, फर्रुखाबाद, हरदोई और औरैया के किसान भी यहां से पौध ले रहे हैं। खेत में रोपाई के बाद पौध के खराब होने की संभावना कम रहती है और फसल भी समय से पहले तैयार होने में मदद मिलती है।
केंद्र प्रभारी प्रवीण पटेल ने बताया कि किसानों को कम लागत में गुणवत्तापूर्ण पौध उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। किसान अपना बीज उपलब्ध कराते हैं तो उन्हें एक रुपये प्रति पौधा की दर से पौधे तैयार कर दिए जाते हैं। वहीं, केंद्र से बीज लेकर पौध प्राप्त करने वाले किसानों को दो रुपये प्रति पौधा की दर से पौध उपलब्ध कराई जाती है। केंद्र की यह पहल किसानों को खुद नर्सरी तैयार करने की मेहनत और खर्च से बचाने के साथ-साथ बेहतर गुणवत्ता वाली पौध उपलब्ध करा रही है। इससे सब्जी उत्पादक किसानों को कम समय में स्वस्थ फसल, बेहतर उत्पादन और खेती में अधिक लाभ मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
वैज्ञानिक विधि से तैयार हो रही पौध
केंद्र में अगेती और मुख्य सीजन की फसलों की उन्नत एवं संकर प्रजातियों की पौध प्लग-ट्रे और कोकोपीट मीडिया में वैज्ञानिक विधि से तैयार की जा रही है। इनमें टमाटर की 80 हजार, शिमला मिर्च की 80 हजार, फूलगोभी की 60 हजार, पत्तागोभी की 50 हजार, पतली मिर्च की 45 हजार और बैंगन की 35 हजार पौध शामिल हैं। इसके अलावा अन्य सब्जियों की पौध भी तैयार की जा रही है।