फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

53 गोशालाओं पर 25 लाख खर्च फिर भी समस्या बरकरार

विज्ञापन
विज्ञापन
कन्नौज। अन्ना मवेशियों से किसानों को छुटकारा दिलाने की मुहिम ब्लाक और निकायों में बैठे अफसरों के कारण रंग नहीं ला पा रही है। कई बार फटकार और कार्रवाई के बाद भी लापरवाही जारी है। मार्च तक के आंकड़ों को देखें तो जिले की 53 गोशालाओं पर 25 लाख से ज्यादा की धनराशि खर्च की जा चुकी है। इसके बाद भी समस्या बरकरार है।
विज्ञापन



अफसरों का दावा है कि जिले की सभी 53 अस्थायी गोशालाओं में चार हजार से ज्यादा मवेशी बंद हैं। वहीं किसानों का दावा है कि वह लोग दिन में अन्ना मवेशियों को बाड़े में बंद करते हैं, रात में कर्मचारी उन्हें छोड़ देते हैं। तेराजाकेट में सात बीघा मक्का की फसल अन्ना मवेशी चट कर गए तो किसानों के ऐसे ही कुछ आरोप थे। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी विनोद त्रिवेदी बताते हैं कि मार्च तक इन मवेशियों की देखरेख पर 25 लाख 32 हजार 600 रुपये खर्च किए जा चुके हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर अन्ना मवेशियों के मामले में ऐसी लापरवाही क्यों बरती जा रही है। जिले की सड़कों पर अन्ना मवेशियों की मौजूदगी आसानी से दिख जाती है। इसके बाद भी अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।


चुनाव में अन्ना मवेशी बने थे मुद्दा
25 अप्रैल को तिर्वा के डीएन कालेज छात्रावास मैदान में गठबंधन प्रत्याशी के समर्थन में सपा प्रमुख अखिलेश यादव, बसपा प्रमुख मायावती, रालोद प्रमुख चौ. अजित सिंह की संयुक्त जनसभा थी। तभी हेलीपैड पर एक सांड़ घुस गया था। इस मामले को अखिलेश ने मंच से उठाया था। अन्ना मवेशियों को लेकर प्रदेश सरकार को घेरा भी था। 27 अप्रैल को गुरसहायगंज में अखिलेश और डिंपल के रोड शो में भी सांड़ घुस गया था। इससे भगदड़ मच गई थी। इतना सब होने के बाद भी अन्ना मवेशियों पर लगाम न लग पाना चिंता का विषय बना हुआ है।
विज्ञापन





53 गोशालाओं पर 25 लाख खर्च, समस्या बरकरार
जिले भर में 53 अस्थायी गोशालाओं में चार हजार से ज्यादा मवेशियों के होने का दावा कर रहे अफसर, 30 रुपये प्रति मवेशी के हिसाब से रोजाना बजट देने का है प्रावधान
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें