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अब कोहरे और धुंध में नहीं थमेंगे ट्रेनों के पहिए

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कन्नौज। कोहरे का कहर इस बार रेल यात्रियों के सफर में रोड़ा नहीं बनेगा क्योंकि अब धुंध के चलते ट्रेनों को सिग्नल के इंतजार में ट्रेनों के पहिये नहीं थमेंगे। यह संभव होगा ट्रेनों में फॉग सेफ डिवाइस लगाकर। सर्दियों में लोको पायलट को जीपीएस से लैस डिवाइस उपलब्ध करा दी गई है। यह डिवाइस घने कोहरे में भी 500 मीटर पहले ही क्रासिंग, रेल पुल और सिग्नल जानकारी दे देगी।

कोहरा घना होते ही ट्रेनों को चलाने में रेलवे के लिए मुश्किल खड़ी होने लगती है। दिसंबर से फरवरी के लिए ट्रेनों को निरस्त भी जाता है। जो बड़े रूट की ट्रेनें बांद्रा, छपरा, जयपुर तक जाने वाली चलती हैं उनके यात्री भी गंतव्य के लिए दूसरे-तीसरे दिन पहुंचते हैं। वहीं लोकल ट्रेनें भी आठ-आठ घंटे लेट होती है। पिछले सप्ताह दो दिन पड़े कोहरे ने भी इसका असर दिखाया। कोहरे से हार चुके रेलवे को इस बार फॉग सेफ डिवाइस में इससे लडने की संभावना दिख रही है।
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ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम आधारित इस उपकरण के माध्यम से सिग्नल न दिखने जैसी ड्राइवरों की समस्या का समाधान किया गया है। सिग्नल आने के 500 मीटर पहले ही यह ड्राइवरों को चेतावनी देता है। इज्जतनगर मंडल के पीआरओ (पब्लिक रिलेशन आफिसर) राजेंद्र सिंह ने बताया कि विभाग ने फॉग सेफ जीपीएस से लैस डिवाइस होने से स्क्रीन पर लोको पायलट को पूरी जानकारी मिलती रहेगी। सभी ट्रेनों और मालगाड़ियों में इसे लगा दिया गया है।

इस डिवाइस का प्रयोग पिछले साल किया गया था, लेकिन सभी ट्रेनों में डिवाइस न लगने के कारण इसका कोई फायदा नहीं मिल सका। नतीजा, कोहरे में ट्रेनों की लेटलतीफी ने यात्रियों को परेशान ही किए रखा। कानपुर-कन्नौज-फर्रुखाबाद रूट पर चलने वाली हर ट्रेन में यह डिवाइस होगी। घने कोहरे के दौरान सिग्नल दिखाई देने बंद हो जाते हैं। पास क्लियर न हो पाने के कारण ट्रेनों को ट्रैक पर ही खड़ा कर दिया जाता है। इससे ट्रेनें लेट होती हैं। इससे निपटने के लिए इस डिवाइस की व्यवस्था की गई है। फॉग सेफ्टी डिवाइस लोको पायलट का हेल्पिंग हैंड हैं। डिवाइस में लोको पायलट को किलोमीटर वाइज सभी डिटेल्स फीड कर दी जाती हैं। इसमें ट्रेन शुरू करने के बाद सिग्नल, क्रासिंग और स्टेशन आदि की दूरी फीड कर दी जाती है। जैसे ही ट्रेन लोकेशन से 500 मीटर पहले पहुंचती हैं, डिवाइस लोको पायलट को अलर्ट कर देती है। वहीं प्वाइंट क्रास होने के बाद भी उसके बारे में सूचना देता है। इससे लोको पायलट एक्टिव हो जाते हैं और घने कोहरे के बाद भी सभी सिग्नल्स और क्रासिंग को आसानी से जान लेते हैं।
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जब घना कोहरा-धुंध होती है, तो रेलवे पटाखा बजाकर लोको पायलट को सिग्नल का संकेत देते हैं। स्टेशन के अप-डाउन आउटर पर पोटर के माध्यम से पटरी पर पटाखा बांध दिया जाता है। चार-पांच महीने तक कोहरे की समस्या रहती है। फाग सेफ डिवाइस के बाद भी फिलहाल पटाखा बोलने का सिस्टम जारी रहेगा। रेलवे सूत्रों के मुताबिक बरेली सेक्शन में करीब आठ से दस लाख रुपये पटाखों पर खर्च होता होगा। कोहरे और धुंध में लोग रेल लाइन क्रॉस न करें, क्योंकि इससे उनकी जान को खतरा भी हो सकता है और वैसे भी यह अपराध की श्रेणी में आता है। आरपीएफ एसआई प्रमोद लाकड़ा ने लोगों से अपील की है कि लोग रेलवे के नियमों का पालन करते हुए क्रासिंग को पार न करें।



अब कोहरे और धुंध में नहीं थमेंगे ट्रेनों के पहिये
फाग सेफ डिवाइस से लोको पायलट को मिलेगी सिग्नल की लोकेशन
500 मीटर पहले ही चालक को मिल जाएगा संकेत
राहुल दुबे
फोटो 01केएनजेपी 01- रेलवे स्टेशन कन्नौज।
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