कन्नौज। अधिकारियों के लिए टाइप-4 के बनाए गए 24 आवास हस्तांरित होने से पहले ही जर्जर हो गए है। इन आवासों के खिड़की और दरवाजे तक गायब हो चुके हैं।
अफसरों के लिए टाइप-4 के 30 आवास बनाने के लिए वर्ष 2015 में 7.27 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत हुआ। इस धनराशि से पाल चौराहा के निकट चौकी मुस्तफाबाद क्षेत्र में टाइप-4 के 24 आवास बनाए गए। आज तक इन 24 आवासों का हस्तांतरण नहीं हो सका। अब ये आवास पूरी तरह से जर्जर हो गए। शेष छह आवास कलक्ट्रेट परिसर में बनाए गए है। इनमें तीन आवास सीडीओ, सीएमओ व एडीएम के है।
राजस्व ग्राम चौकी मुस्तफाबाद पाल चौराहे से एक किलोमीटर दूरी पर खेतों के बीच बने अधिकारियों के टाइप-4 आवास हस्तांतरित होने से पहले ही जर्जर हो गए। आवासों के दरवाजे और खिड़कियां गायब हो चुके हैं। बाउंड्रीवॉल से घिरे परिसर में झाड़ियां है। आवास के छज्जे, बालकनी और छतों पर पीपल बरगद के पेड़ हैं। आवासों तक पहुंचने के लिए एक किलोमीटर का मार्ग बेहद जर्जर टूटे-फूटे खड़ंजायुक्त है।
शहर से दूर होने व आउट एरिया में होने के कारण लगातार इनकी अनदेखी होती रही। यही वजह है कि 10 वर्षों में आवास जर्जर और खस्ताहाल होकर निष्प्रयोज्य घोषित करने लायक हो गए। ठेकेदार जयकुमार तिवारी ने बताया कि सपा शासनकाल में आवासों का निर्माण किया गया था। सरकार बदलने के बाद आवासों को पूरा करने के लिए बजट नहीं मिला है। इसके लिए प्रमुख सचिव को पत्र भी लिखा गया था।
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता दीपेश अस्थाना का कहना है कि हस्तांतरण से पहले आवासों की देखरेख व सुरक्षा की जिम्मेदारी ठेकेदार की थी। अभी तक 24 आवासों का हस्तांतरण नहीं किया गया है। जिलाधिकारी आशुतोष मोहन अग्निहोत्री का कहना है कि टाइप-4 आवासों में जो कमियां हैं,उनको दुरुस्त करने के लिए लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता को निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही आवासों की कमियों को दूर कर हस्तांतरण कराया जाएगा।