कन्नौज। जिला योजना समिति की बैठक में 2.39 अरब के प्रस्तावों को प्रभारी मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी ने स्वीकृति दे दी है। प्रस्तावित काम नए वित्त वर्ष से शुरू कराए जाएंगे। 38 विभागों में सबसे ज्यादा मनरेगा के 54.30 करोड़ के कामों को हरी झंडी दी गई है। दूसरे नंबर पर 48.58 करोड़ से ग्रामीण क्षेत्रों में आवास बनाने के लिए सहमति मिली है। सड़क और पुलिया निर्माण के लिए 25.62 करोड़ के कामों को हरी झंडी मिली है। सबसे कम दो लाख रुपये के काम खादी ग्रामोद्योग के रहे। पर्यावरण के कामों पर सिर्फ पांच लाख रुपये खर्च किए जाएंगे।
कलक्ट्रेट सभागार में हुई जिला योजना समिति की बैठक की अध्यक्षता प्रभारी मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी ने की। इस दौरान प्राथमिक, माध्यमिक, उच्च, प्राविधिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य, होम्योपैथिक, आयुर्वेदिक, यूनानी, ग्रामीण पेयजल, प्रधानमंत्री आवास, ग्रामीण स्वच्छता, नगरीय, पेयजल, सड़क, वन, समाज कल्याण, पुष्टाहार, महिला कल्याण, नगर विकास, अनुसूचित जाति आदि विकास से प्रस्तावित प्रस्तावों पर चर्चा की गई।
मुख्य विकास अधिकारी प्रेमप्रकाश त्रिपाठी ने प्रस्ताव पढ़कर सुनाए। इसके बाद वित्त वर्ष 2020-21 के लिए कृषि विभाग के 24 लाख, एसएमएफपी के 2 करोड़ 68 लाख 50 हजार, पशुपालन विभाग के 3 करोड़ 69 लाख 57 हजार, दुग्ध विभाग के 2 करोड़ 17 लाख 31 हजार, सहकारिता विभाग के एक करोड़ 88 लाख 24 हजार, वन विभाग के 6 करोड़ 51 लाख 98 हजार, ग्राम विकास विशेष कार्यक्रम के लिए 14 करोड़ 50 लाख, रोजगार कार्यक्रम मनरेगा के 54 करोड़ 30 लाख 54 हजार, पंचायतीराज विभाग के 9 करोड़ 73 लाख 48 हजार, निजी लघु सिंचाई के 15 करोड़ 56 लाख 35 हजार, राजकीय लघु सिंचाई विभाग के 7 करोड़ 25 लाख तीन हजार, अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत के 97 लाख 20 हजार, खादी ग्रामोद्योग के दो लाख, सड़क एवं पुलिया के 25 करोड़ 62 लाख 22 हजार, पर्यावरण के लिए पांच लाख रुपये, पर्यटन विभाग के 80 लाख, प्राथमिक शिक्षा के 8 करोड़ 60 लाख, माध्यमिक शिक्षा के 6 करोड़ 70 लाख 51 हजार, प्राविधिक शिक्षा के 39 लाख 71 हजार, प्रादेशिक विकास दल के 14 लाख 30 हजार, एलोपैथिक पर 9 करोड़ 70 लाख, अस्पतालों/औषधालयों में विशिष्ट सुविधाओं के लिए 30 लाख, परिवार कल्याण विभाग के 4 लाख 74 हजार, होम्योपैथिक के लिए 42 लाख, आयुर्वेदिक के लिए 20 लाख, यूनानी के लिए 35 लाख 90 हजार, ग्रामीण स्वच्छता के लिए 7 करोड़ 20 लाख, ग्रामीण आवास पर 48 करोड़ 58 लाख 92 हजार, नगर विकास पर एक करोड़ नौ लाख सात हजार, अनुसूचित जाति कल्याण विभाग के दो करोड़ 10 लाख 32 हजार, पिछड़ा जाति कल्याण 3 करोड़ 82 लाख 92 हजार, अल्पसंख्यक कल्याण के 2 करोड़ 55 लाख, समाज कल्याण सामान्य जाति एक करोड़ 21 लाख, शिल्पकार प्रशिक्षण के लिए 2 करोड़ 68 लाख, समाज कल्याण विभाग के 3 करोड़ 87 लाख 75 हजार, दिव्यांग जन सशक्तीकरण विभाग के एक करोड़ 46 लाख 40 हजार, महिला कल्याण विभाग के एक करोड़ 54 लाख 98 हजार, पुष्टाहार के 20 लाख के प्रस्तावों को प्रभारी मंत्री ने स्वीकृति दी। कुल दो अरब 38 करोड़ 82 लाख आठ हजार रुपये से 38 विभाग यह काम कराएंगे।
बैठक में पूर्व राज्यमंत्री और छिबरामऊ विधायक अर्चना पांडेय, तिर्वा विधायक कैलाश राजपूत, सांसद प्रतिनिधि, जिलाधिकारी रवींद्र कुमार, एसपी अमरेंद्र प्रसाद सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. कृष्ण स्वरूप, जिला विद्यालय निरीक्षक राजेंद्र बाबू, बीएसए केके ओझा आदि अधिकारी मौजूद रहे।
पेयजल योजना में धांधली का गरमाया मुद्दा
बैठक के दौरान समिति के सदस्यों ने पेयजल योजना में धांधली की शिकायत की। कहा कि घटिया काम के कारण कई गांवों में पानी नहीं पहुंच रहा है। करोड़ों खर्च होने के बाद भी लोगों को सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। शिकायत के बाद भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। बैठक में धांधली का मामला सामने आने के बाद प्रभारी मंत्री ने नाराजगी जताई। सीडीओ को निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच के निर्देश दिए। कहा कि धांधली सामने आने के बाद दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। ग्रामीण पेयजल योजना के तहत जिन टंकियों का निर्माण कार्य अथवा पाइप लाइन का कार्य अधूरा हो उसे तत्काल पूरा किया जाए। पूर्व राज्यमंत्री अर्चना पांडेय ने भी पेयजल की समस्या पर सख्त नाराजगी जताई। कहा कि यदि ठेकेदार लापरवाही बरत रहा है तो उसके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई जाए। गर्मी के मौसम को देखते हुए पेयजल व्यवस्था दुरुस्त कराई जाए। जिलाधिकारी रवींद्र कुमार ने निर्देश दिए कि विकास कार्यों को समय पर और मानक के मुताबिक पूरा किया जाए। सभी अधिकारी बैठक में खुद उपस्थित हों। अपने अधीनस्थ को न भेजें। आरईडी विभाग के अधिशासी अभियंता को बैठक में अनुपस्थित पाये जाने पर संबंधित अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगने के निर्देश दिए।