कन्नौज। शहर का संग्रहालय अब इतिहास प्रेमियों, छात्र-छात्राओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है। यहां पहुंचते ही अतीत की परतें आंखों के सामने खुलती महसूस होती हैं। संग्रहालय की दीवारें संस्कृति, शौर्य और परंपरा की गौरवगाथा सुनाती हैं। कुषाण काल का करीब 1900 साल पुराना दुर्लभ घड़ा भी विरासत की कहानी कहता है।
संग्रहालय में राजा जयचंद्र और हर्ष वर्धन काल का काल्पनिक दरबार खास है। राजसी साज-सज्जा और वेशकीमती मूर्तियां लोगों को इतिहास के पन्नों तक पहुंचा देती हैं। वीरता की मिसाल आल्हा-ऊदल की महफिल युवाओं और इतिहास प्रेमियों को खूब लुभा रही है। दीवारों पर उकेरी गई ऐतिहासिक झलकियां जिले की गौरवगाथा से रूबरू कराती हैं। कुषाण काल का 1900 साल पुराना घड़ा लोगों के आकर्षण का बड़ा केंद्र बना है, जिसके नीचे कुषाण वंश 78 ई० से 230 ई० अंकित है। संग्रहालय का इत्र अनुभाग भी पारंपरिक इत्र निर्माण के पुराने उपकरण, दुर्लभ शीशियों और खुशबुओं की विरासत को खूबसूरती से सजाए हुए है। विश्व संग्रहालय दिवस पर लोगों ने इसे शहर की आत्मा, इतिहास और विरासत का जीवंत आईना बताया।
बच्चों को इतिहास से जोड़ने का अवसर
संग्रहालय में समय-समय पर स्कूली बच्चों का भ्रमण कराया जाता है। यहां बच्चे जिले के इतिहास, वीर गाथाओं और इत्र उद्योग की जानकारी लेकर अपनी विरासत को करीब से समझते हैं। शिक्षक अमित मिश्रा का कहना है कि किताबों से ज्यादा यहां की झलक बच्चों को इतिहास से जोड़ रही है। यह उन्हें अपनी जड़ों से जुड़ने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है।
निशुल्क प्रवेश और प्रतियोगिताएं
संग्रहालयाध्यक्ष राम प्रकाश यादव ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस पर कार्यक्रम आयोजित होंगे। उन्होंने यह भी बताया कि 15 मई से 30 जून तक संग्रहालय में निशुल्क प्रवेश की व्यवस्था लागू कर दी गई है। संस्कृति एवं पर्यटन विभाग के निर्देश पर पर्यटकों, छात्र-छात्राओं और उनके परिवारों को मुफ्त प्रवेश दिया जाएगा। डॉ. पवन तिवारी ने बताया कि सोमवार, 18 मई को संग्रहालय में चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। इसमें छात्र-छात्राएं सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत से जुड़े विषयों पर अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे।
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