बुआई से पहले शोधित करने की दवा डाल देने से एक किसान का 18 बीघा आलू अंकुरित नहीं हो सका। इससे उसे लाखों रुपये की क्षति हो गई। दवा विक्रेता की शिकायत उपजिलाधिकारी तिर्वा से की गई है।
तिर्वा तहसील क्षेत्र के गांव लालशाहपुरवा मौजा वहसुईया निवासी वेदप्रकाश ने अपने ही परिवार के श्रीकांत, रमाकांत, उमाकांत, रविकांत के 23 बीघा खेत सात हजार रुपये प्रतिबीघा की दर से एक वर्ष के लिए लिए थे। करीब 18 बीघा खेत में मकनपुर से 14 अक्तूबर को आलू के बीज को शोधित करने वाली दवा खरीदी थी।
आलू का बीज शोधित करने के बाद उसने 20 नवंबर को बुआई कर दी। 38 दिन बीत जाने के बाद भी आलू की फसल का पौधा बाहर नहीं निकला। किसान का आरोप है कि दुकानदार ने उसे नकली दवा दे दी। इस कारण उसके आलू का बीज बोने के बाद भी अंकुरित नहीं हुआ। इससे करीब चार लाख रुपये का नुकसान हुआ। पीड़ित किसान ने उपजिलाधिकारी तिर्वा को पत्र देकर खेत की जांच कराने व संबंधित दुकानदार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।