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शीतगृहों में पड़ा है 10 फीसदी आलू

Mon, 05 Dec 2016 11:28 PM IST
अमर उजाला ब्यूराो/कन्नौज
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एशिया में आलू पैदावार के लिए पहचान बना चुके कन्नौज में अब आलू की ठसक कमजोर पड़ गई है। नोटबंदी की मार ने नए और पुराने दोनों आलू को चित कर दिया है। किसान परेशान हैं। इधर मंदी के कारण किसान अपना पुराना आलू कोल्ड से बाहर नहीं निकाल रहा है, तो मंदी के चलते किसान नया आलू खोदने के लिए तैयार नहीं हैं। हालात ये हैं कि कोल्ड स्टोरों में अभी भी किसानों का 10 फीसदी आलू पड़ा हुआ है। कोल्ड मालिक व जिला प्रशासन किसानों को आलू हटाने के लिए अल्टीमेटम दे चुके हैं।
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जिले में करीब 101 शीतगृह चालू हालत में हैं। इन शीतगृहों को नवंबर के प्रथम पखवारे तक खाली होने के निर्देश जिला उद्यान विभाग ने जारी किए थे, लेकिन नोटबंदी का फरमान आने के बाद तिथि को बढ़ा दिया है। यह तिथि बढ़कर अब 30 दिसंबर हो गई है। शीतगृह स्वामियों ने कोल्ड में रखे आलू को बाहर निकालना शुरू कर दिया है। यह आलू कोल्ड परिसर के बरामदों में सुरक्षित रखा जा रहा है। कोल्ड मालिकों ने किसानों को आलू हटाने के लिए नोटिस भेजनी शुरू कर दी है। लेकिन अभी भी कन्नौज में फर्रुखाबाद जैसे हालत नहीं है।

 जिला उद्यान अधिकारी मुन्ना यादव का कहना है कि शीतगृहों में पांच से छह फीसदी आलू शेष रह गया है। किसानों को नोटिस जारी हो चुकी हैं। शीतगृहों का लगातार दौरा किया जा रहा है। तमाम किसान आलू उठा भी रहे हैं। शीतगृह मालिक भी जरूरतमंद लोगों को निशुल्क में आलू दे रहे हैं, ताकि उनको बाद में आलू सड़कों के किनारे फेंकना न पड़े।   
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भाव न मिला को कच्ची फसल को पक्का करेंगे किसान
कन्नौज। आलू की खुदाई किसान 45 व 90 दिन में करता है। 45 दिन में खोदकर बेची गई फसल कच्ची फसल होती है। पक्की फसल का लाभ किसानों को 90 दिन बाद मिलता है। उद्यान विभाग के आंकड़ों को माने तो साल 2016 में पक्की आलू की फसल 48 हजार 500 हेक्टेयर में बोई गई थी। जिसमें 15 फीसदी पक्का आलू भी साथ चल रहा है। कच्ची आलू के व्यापारी कुलदीप त्रिवेदी, भानू पाठक, रमाकांत यादव का कहना है कि आलू की बिक्री प्रति पैकेट 300 से 325 रुपये में बिक रहा है। जरूरतमंद को वह लोग चेक से भुगतान कर रहे हैं, जबकि शेष सभी किसानों का बकाया कर लिया गया है। कहा कि नोटबंदी से खुदाई भी प्रभावित हुई है। कम रेट के चलते आलू की आवक कम है। रेट न मिला तो इसे पक्की फसल में बदल देंगे।

किसान रमाकांत द्विवेदी, अरुण तिवारी, विनय अवस्थी का कहना है कि नोटबंदी के फरमान से काफी नुकसान उठाना पड़ा है। पुराने आलू का तो कोई भाव ही नहीं रह गया, जबकि नए आलू पर भी इसकी मार पड़ी है। आलू का भाव मिल गया तो कच्ची खुदाई कर इसके स्थान पर गेहूं की बुवाई हो जाएगी। जिससे उन्हें लाभ मिल जाएगा। नहीं तो कच्ची फसल को पक्का करना पड़ेगा। जिससे उनकी गेहूं की पैदावार मारी जाएगी।
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