झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में डिजिटल एक्सरे मशीन को खराब पड़े-पड़े एक महीना होने वाला हैै। इसके बावजूद मशीन सुधारी नहीं जा सकी है। मरीजों को रोजाना पंद्रह हजार रुपये की जांच बाहर से करवानी पड़ रही है। इसकी आड़ में डॉक्टर भी खूब चांदी काट रहे हैं। वह नियमों का मखौल उड़ाते हुए सरकारी पर्चे पर निजी सेंटर का नाम लिख रहे हैं।
दिसंबर में ही शासन की फटकार के बाद कॉलेज में मशीनें सुधरी थीं। कुछ हफ्ते चलने के बाद फिर से मशीनें खराब हो गई हैं। एक अल्ट्रासाउंड मशीन छह महीने तो दूसरी एक माह से खराब पड़ी है। डिजिटल एक्सरे मशीन को खराब हुए भी एक महीने होने को आ रहे हैं। जबकि, प्रतिदिन 50 मरीज डिजिटल एक्सरे कराने आते हैं। कॉलेज प्रशासन मशीन सुधरवाने में तेजी नहीं दिखा रहा है। इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। इसका फायदा डॉक्टर उठा रहे हैं। वह सेटिंग वाले जांच केंद्रों का नाम सरकारी पर्चे पर लिख रहे हैं। जबकि, यह नियम विरुद्ध है। मगर कोई भी जांच करने वाला नहीं है, इसलिए डॉक्टरों के हौसले भी बुलंद हैं।
इसी केंद्र से एक्सरे कराकर लाओ
मेडिकल कॉलेज में जालौन निवासी असलम अपनी पत्नी अफसाना को दिखाने के लिए आया था। जांच के बाद डॉक्टर ने उसके पर्चे पर डिजिटल एक्सरे लिखा। साथ ही कहा कि मेडिकल कॉलेज में मशीन खराब पड़ी हुई है, इसलिए पर्चे पर लिखे सेंटर पर ही जाकर जांच करवाकर ले आओ। पर्चे पर बाकायदा सेंटर का नाम भी लिखा गया।
दरों में ढाई गुना का अंतर
जांच मेडिकल निजी केंद्र
डिजिटल एक्सरे 115 300
दस दिन पहले ही रेडियोलॉजी विभाग का चार्ज मुझे मिला है। डिजिटल एक्सरे मशीन की सीएमसी नहीं है। फिर भी इंजीनियर को बुलाकर उसे सुधरवाने का प्रयास किया जा रहा है। मशीन जल्द सुधर जाएगी।
- डॉ. अंशुल जैन, विभागाध्यक्ष, रेडियोलॉजी।