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विश्व वन जीव दिवस : हमें भी चाहिए प्यार-दुलार, कर लो हमसे दोस्ती

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झांसी। विश्व वन्य दिवस बृहस्पतिवार को मनाया जाएगा। हर वर्ष इसे 03 मार्च को मनाया जाता है। लोगों का मानना है कि वन्य जीव हिंसक होते हैं, हमें इनसे दूर ही रहना चाहिए। लेकिन वन्य जीवों से ही हमारे जंगल और हमारे आसपास की दुनिया खूबसूरत है। इन्हें दुत्कार नहीं बल्कि आपके प्यार और दुलार की जरूरत है। ये जीव भी हमारे अच्छे दोस्त बन सकते हैं।
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हमारे आसपास बंदर, मोर, मकाऊ, भालू, रंग-बिरंगे पक्षियों की एक अलग ही दुनिया है। झांसी के उद्यान विभाग में मोरों का सुंदर बसेरा है। सुबह-शाम उद्यान में दर्जनों मोर घूम-घूमकर लोगों को आकर्षित करते हैं। उद्यान प्रभारी जेएस यादव बताते हैं कि कुछ महीनों से कई मोर आने लगे हैं। उद्यान के कर्मचारी और घूमने वाले लोग इन्हें दाना खिलाते हैं। वहीं उद्यान में नीले रंग की चमकीले पंख वाली कई तरह की चिड़िया लोगों को खूब लुभाती है।
मकाऊ और परन शर्मा में है गजब की दोस्ती
झांसी। शहर में अयोध्यापुरी में रहने वाले परन शर्मा (विधायक रवि शर्मा के पुत्र) के घर पर सुंदर चिड़ियों और मकाऊ पक्षी का बसेरा है। इस साउथ अमेरिकन तोते और परन शर्मा में गजब की दोस्ती है। मक ाऊ उन्हें प्यार से पारू बुलाता है और उन्हें देखते ही बच्चों की तरह उनके हाथ और कंधे पर चढ़ जाता है। परन बताते हैं कि इस मकाऊ का नाम उन्होंने प्यार से मैंगो रखा है। उसकी उम्र तीन साल है। वह घर में सभी के नाम बुलाता है। उधर, ललितपुर के मड़ावरा की रीछना पहाड़ी पर 200 से अधिक भालुओं की अपनी ही दुनिया है। वन विभाग इस स्थान को संरक्षित करने की तैयारी कर रहा।
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लखंजर में तेजी से बढ़ रही गिद्धों की संख्या
मड़ावरा (ललितपुर)। पर्यावरण संतुलन एवं जैव खाद्य श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले भारतीय गिद्धों के संरक्षण की महती आवश्यकता है। ललितपुर के मड़ावरा वन क्षेत्र के ग्राम लखंजर के जंगलों में गिद्धों की बढ़ती संख्या पर्यावरण संतुलन के लिए एक सकारात्मक संकेत है। मोबाइल नेटवर्क की पहुंच से दूर मदनपुर पूर्वी वनबीट में फटन स्थान पर एवं लखंजर के जंगलों में ऊंची पहाड़ियों में गिद्ध अपने प्राकृतिक निवास में पनप रहे हैं और इनकी संख्या भी बढ़ रही है। गिद्धों के संरक्षण के लिए वन विभाग द्वारा भी कार्यक्रम चलाए जाते हैं। पहाड़ी के आसपास पहले गिद्धों की संख्या बढ़ाने के उदेश्य से एक रेस्टोरेंट भी खोला गया था। जो देखभाल के अभाव में अब नहीं दिखता। संवाद
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