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सामाजिक अनेकता में एकता समय की जरूरत

Sun, 11 Oct 2015 01:38 AM IST
झांसी
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झांसी। राजकीय संग्रहालय में शनिवार को उदय नारायण कनकने द्वारा लिखित गहोई वैश्य समाज एवं अखिल भारतीय वैश्य महासभा का इतिहास (1915 -2015) ग्रंथ का लोकार्पण मुख्य अतिथि वरिष्ठ हिंदी साहित्यकार डा. गंगाप्रसाद बरसैया व विशिष्ट अतिथि अखिल भारतीय गहोई वैश्य महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कैलाश नारायण सांवला व यशोवर्द्धन गुप्ता ने किया। ग्रंथ में समाज की गतिविधियों, महासभा के पदाधिकारियों की सक्रियता, अध्यक्षों के  विचार एवं समाज के द्वारा किए विभिन्न सेवा कार्यों का इतिहास एवं संकलन है। 
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 लोकार्पण अवसर पर मुख्य अतिथि ने कहा कि यह ग्रंथ समाज की एक बड़ी कमी की पूर्ति करेगा तथा समाज के प्रत्येक घर में इस ग्रंथ का स्वागत होगा। आज समाज के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों व समाज सेवियों के जीवन दर्शन एवं उनकी गतिविधियों के  भी संकलन की आवश्यकता है। राष्ट्रीय अध्यक्ष कैलाश नारायण सांवला ने बताया कि भोपाल में 24 व 25 अक्टूबर को महासभा क ा सम्मेलन होगा, जिसमें समाज के लोग बढ़ चढ़कर प्रतिभाग करें। राष्ट्रकवि मैथिली शरण गुप्त ट्रस्ट के चेयरमैन डा. विजय खैरा ने कहा कि जिस तरह से देश में अनेकता में एकता है, उसी तरह समाज में भी एकता होनी चाहिए। इस अवसर पर  दामोदर दास गेड़ा, किशोरी शरण सरावगी, मांगी लाल बिलैया, लखन लाल, कैला नीखरा, डा. भरत कनकने, कामता प्रसाद बडौनिया, जर्नादन नगरिया, प्रमोद गुप्त, आनंद सेठ, सुभाष खर्द, अनिल पटवारी, संजय पटवारी, उमेश छिरौल्या, राम प्रकाश हथनोरिया, सुनील गुप्ता, महेश राय, लक्ष्मी नारायण सिजरिया, नरेश गुप्ता, नितिन सरावगी, नीलम गुप्ता, अवध बिहारी सोनी, डा.नीति शास्त्री, हरगोविंद कुशवाहा, कुंज बिहारी गुप्ता, डा. सीताराम बरसैया, सौरभ रावत भांजे आदि मौजूद रहे। इससे पूर्व अतिथियों का स्वागत शशि भूषण कनकने एवं प्रमोद गुप्ता ने किया। संचालन प्रकाश गुप्ता ने किया, जबकि विजय नारायण कनकने ने आभार जताया। 
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