झांसी। पुराने अधिवक्ता भवन को ध्वस्त किए जाने की अनुमति न मिल पाने की वजह से नई बिल्डिंग का निर्माण लटका हुआ है। जबकि इसके लिए शासन से दो साल पहले पांच करोड़ रुपये की धनराशि आवंटित की जा चुकी है। इसमें 65 लाख से सिर्फ चैंबर बनाए गए, जबकि बाकी 4 करोड़ 35 रुपया प्रशासन के खाते में डंप पड़ा है।
दो साल पहले जिला अधिवक्ता संघ के एक कार्यक्रम में शामिल होने आए तत्कालीन विधि मंत्री बृजेश पाठक से वकीलों ने पुराने की जगह पर नए अधिवक्ता भवन के निर्माण के लिए बजट मांगा था। इसके तकरीबन एक माह बाद पांच करोड़ रुपये की धनराशि शासन की ओर से जारी कर दी गई थी। इस धनराशि में से 65 लाख रुपये लागत से अधिवक्ताओं के चैंबर का निर्माण तो कर दिया गया है, जबकि पुराने अधिवक्ता भवन की अब तक सुध नहीं ली गई है। ये बिल्डिंग लगातार जर्जर होती जा रही है। आए दिन दीवारों व छत का प्लास्टर गिरता रहता है। इसमें बैठने तक से अधिवक्ताओं को डर लगने लगा है, लेकिन पुराने भवन को तोड़ने की अनुमति न मिलने की वजह से नए भवन का निर्माण लटका हुआ है। उधर, बाकी बचा 4 करोड़ 35 लाख रुपया अभी तक यूं ही पड़ा हुआ है।
पुराने अधिवक्ता भवन को ध्वस्त करने की अनुमति नहीं मिल पा रही है, जिससे नए का निर्माण शुरू नहीं हो पा रहा है। इसके लिए शासन से लगातार पत्राचार किया जा रहा है।
- छोटेलाल वर्मा, सचिव, जिला अधिवक्ता संघ