झांसी। कोरोना काल में पिछले डेढ़ सालों तक चली ऑनलाइन पढ़ाई के गंभीर परिणाम सामने आने लगे हैं। ऑफलाइन पढ़ाई शुरू होने के बाद अब अभिभावकों को अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। मां जब बच्चों को स्कूल भेजतीं हैं तो बच्चे पेट दर्द, सिरदर्द से लेकर तरह-तरह के बहाने बनाने लगते हैं। कोई तो जान देने तक की धमकी देने लगता है। इससे मां-बाप बहुत परेशान हैं।
मार्च 2020 से कोरोना का कहर शुरू होने के बाद सितंबर से शिक्षा व्यवस्था पहले की तरह पटरी पर लौट आई है। हालांकि, ऑनलाइन पढ़ाई के दौर ने बच्चों का स्वभाव काफी हद तक बदलकर रख दिया है। अब कई बच्चे स्कूल जाने को बिल्कुल तैयार ही नहीं हैं। इन्हें स्कूल भेजने में अभिभावकों को जीतोड़ प्रयास करने पड़ रहे हैं। यदि एक दिन बच्चा स्कूल चला भी जाता है तो दूसरे दिन बीमारी के बहाने बनाने लगता है। बच्चे इस बात का जोर दे रहे हैं कि उन्हें ऑनलाइन ही पढ़ाई कराई जाए। बच्चों को मोबाइल की लत ने बिगाड़ दिया है। अब वह दिन भर इंटरनेट पर वीडियो बनाने, गेम खेलने में ही अपना समय बिताना चाहते हैं। परिजन जब जोर जबरदस्ती या फिर मारपीट करते हैं तो कुछ बच्चे जान देने तक की धमकी देने लगते हैं। थक-हारकर अभिभावकों को मनोचिकित्सक का सहारा लेना पड़ रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक उनके पास रोजाना दो से तीन मामले इस तरह के सामने आ रहे हैं।
ये ध्यान रखें परिजन
- बच्चों के साथ मारपीट न करें।
- एकदम से आदत नहीं बदली जाती।
- प्यार से ही समझाने की कोशिश करें।
- फोन की जगह दूसरे खेलों की तरफ रुझान करें।
ये हैं मामले
केस-1
सीपरी बाजार निवासी 14 साल के किशोर डेढ़ साल बाद स्कूल खुला तो परिजनों से जाने से साफ मना कर दिया। कहने लगा अभी कोरोना की तीसरी लहर आने वाली है। बाद में परिजनों ने जोर दिया तो बीमारी के बहाने बनाने लगा। कहने लगा कि वह मोबाइल से पढ़ेगा। मनोचिकित्सक द्वारा काउंसलिंग करने के बाद वह स्कूल जाने को तैयार हुआ।
केस-2
सदर बाजार निवासी बच्चा कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई शुरू होने के बाद नेट की समस्या बताकर दिनभर मोबाइल पर गेम खेलने लगा। डेढ़ सालों में उसे इस कदर मोबाइल की लत पड़ गई कि वो दस मिनट के लिए भी इससे दूर होने को तैयार नहीं हुआ। स्कूल भेजने की जिद पर उल्टा जान देने की धमकी देने लगा। मनोचिकित्सक से इलाज के बाद ठीक हुआ।
कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई के चलते बच्चों का स्वभाव काफी बदल गया है। स्कूल जाने के नाम पर बच्चे बहाने बनाने लगे हैं। जब परिजन मारपीट कर देते हैं तो कुछ बच्चे जान देने की धमकी तक देने लगते हैं। रोजाना दो-तीन बच्चों की काउंसलिंग कर रही हूं। मोबाइल की लत बहुत ज्यादा होने पर दवाएं भी चलानी पड़ती है। - डॉ. शिकाफा जाफरीन, मनोचिकित्सक, जिला अस्पताल।