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झांसीः बुंदेलखंड में हैं वाटर टूरिज्म की अपार संभावनाएं, लुभाती है ऐतिहासिक और प्राकृतिक संपदा

Sun, 27 Sep 2020 12:57 AM IST
झांसी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
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वरुआसागर झरना... - फोटो : अमर उजाला
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बुंदेलखंड प्राकृतिक संपदा से भरपूर है। हरे-भरे मैदानों से लेेकर वन्य क्षेत्र एवं पहाड़ों की श्रृंखला अत्यंत ही मनोरम है। ललितपुर, झांसी, कालिंजर, कालपी, महोबा, बांदा, चित्रकूट कहीं भी जाएं, यहां की प्राकृतिक, सांस्कृतिक, पुरातत्व एवं धार्मिक धरोहर हमेशा अपने अनूठे अंदाज में पर्यटकों को लुभाती है।

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प्राकृतिक एवं मानव निर्मित जल संसाधनों से भरे बुंदेलखंड में वाटर स्पोर्ट्स टूरिज्म की असीम संभावनाएं हैं। जगह -जगह बांध हैं। झीलें हैं और निरंतर बहती नदियां हैं।

पर्यटन विशेषज्ञों का कहना है कि बेहद कम खर्चे में वाटर टूरिज्म योजना को विकसित किया जा सकता है। निश्चित ही टूरिज्म क्षेत्र में यहां महत्वपूर्ण परिणाम आएंगे।
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बुंदेलखंड में ऐतिहासिक एवं पुरातत्व स्मारकों के साथ नदियां, तालाब, बांध खूब हैं। पहूंज बांध एवं गढ़मऊ झील में वोटिंग एवं पैराग्लाइडिंग टूरिज्म को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
-प्रतीक अग्रवाल विभागाध्यक्ष पर्यटन एवं होटल संस्थान बुंदेलखंड विवि

बुंदेलखंड में पर्यटन विकास के लिए मास्टर प्लान बनना चाहिए। प्राकृतिक सुंदरता बहुत है। जल संस्थान बहुत हैं। ऐसे में वाटर स्पोटर्स को बढ़ावा दिया जाए। प्राइवेट सेक्टर को भी बढ़ावा दिया जाए।
-प्रोफे सर सुनील काबिया पूर्व विभागाध्यक्ष पर्यटन एवं होटल मैनेजमेंट बुंदेलखंड विवि

चित्रकूट के रामघाट में वाटर लेजर शो का ट्रायल चल रहा है। वहीं, तालबेहट के मानसरोवर तालाब में वाटर स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने के लिए सरकार को प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है।
-एके रावत उपनिदेशक पर्यटन विभाग

आउटडोर शूटिंग के लिए बुंदेलखंड अच्छा स्थान है। बुंदेलखंड में नहर, जंगल, बांध, सरोवर, पुरातत्व एवं ऐतिहासिक स्मारक सभी कुछ तो है। देशी पर्यटन को बढ़ावा दिया जाए।
-प्रदीप तिवारी पर्यटन विशेषज्ञ एवं आतिथ्य प्रबंधन

गढ़मऊ झील, बरुआसागर झील, कचनेव की झील, सैकरा की झील, चरखारी की झीलें, ललितपुर में बंदरगुड़ा, महोबा में कीरत सागर, मदन सागर में वाटर टूरिज्म को बढ़ावा मिल सकता है।
डा. एसके दुबे प्रभारी क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी

बुंदेलखंड में तीन शताब्दी ईसा पूर्व से लेकर 18 वीं सदी तक के कई महत्वपूर्ण पुरा स्मारक हैं, जो शोध कार्य एवं टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए पर्याप्त हैं।
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डा. चित्रगुप्त श्रीवास्तव इतिहासविद् एवं पर्यटन अधिकारी
 

झांसी दुर्ग से झांकती नगर की हरयाली।

 

Water tuirishm many placement

 

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