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आत्मा की विशुद्धि को बढ़ाता है विशुद्धोदय तीर्थ

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झांसी। बुंदेलखंड में जैन तीर्थों के दर्शन कर भक्त पुण्य कमाने के साथ आत्मा की विशुद्धि भी करते हैं। झांसी से 15 किमी दूर गांव प्यावल में स्थित विशुद्धोदय तीर्थ क्षेत्र में श्रावक-श्राविकाओं आत्मिक शांति का अनुभव होता है। हजारों साल पुराने मंदिरों की गगनचुंबी शिखरें जैन धर्म की पताका को फहरा रही हैं। यहां विराजित भगवान आदिनाथ, भगवान शांतिनाथ, कुंथुनाथ और अरहनाथ की 10वीं शताब्दी की प्राचीन प्रतिमाओं के दर्शन से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
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झांसी सटे उन्नाव बालाजी के पास स्थित प्यावल क्षेत्र में भगवान शांतिनाथ, कुंथनाथ एवं अरनाथ की विशाल प्रतिमा शिलाखंड में हैं। वहीं लगभग 15 फु ट नीचे उतर कर जमीन के नीचे भगवान आदिनाथ स्वामी की अतिशयकारी प्रतिमा विराजमान है। ऐसा कहा जाता है कि इस तीर्थ पर आने वाले भक्त अपनी मनोकामनाओं को सहज ही पूरा कर लेते हैं। कुछ वर्ष पहले भूमि के नीचे मंदिर में जब मार्बल जड़ा गया, तब कुछ दिन बाद यह देखने में आया कि भगवान की वेदी के नीचे दोनों ओर दो छोटे-छोटे द्वार बने हुए हैं। जैन संत आचार्य मयंक सागर जी महाराज ने यहां कई दिनों तक तप किया। जैन संप्रदाय के साथ ही आसपास के दूसरे जाति वर्ग के लोग भी इस तीर्थ पर दर्शन करने आते हैं। तीर्थ पर आचार्य विशुद्ध सागर महाराज के पदार्पण के बाद इस तीर्थ का नाम आत्मा की शुद्धि को बढ़ाने वाला विशुद्धोदय तीर्थ रखा गया। देश के विभिन्न भागों से दर्शनार्थी यहां दर्शन पूजन को पहुंचते रहते हैं।
प्रतिमाओं पर दिखती हैं सफेद धारियां
मंदिर में भगवान शांतिनाथ, कुंथनाथ की विशाल खड़गासन प्रतिमाओं में दूध की सफेद धारियां दिखाई पड़ती हैं। किवदंती है कि पहले यहां एक टीला था। एक गाय आकर यहां पर अपना दूध स्वत: छोड़ देती थी और जब टीले की खुदाई की गई तो जिनेंद्र भगवान की प्रतिमाएं प्रकट हुईं।
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कहते हैं श्रद्धालु
तीर्थ क्षेत्र में तमाम जिन प्रतिमाएं हैं। इन प्रतिमाओं के दर्शन कर आत्मिक शांति का अनुभव होता है। तीर्थ के शिखर धर्म प्रभावना की प्रेरणा देते हैं।- रविंद्र जैन
मंदिर का भव्य प्रांगण और प्राचीन जिनप्रतिमाओं के दर्शन कर पुण्य मिलता है। प्राचीन प्रतिमाओं से सुशोभित क्षेत्र पर भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।- अभिनंदन मोदी
मंदिर में भगवान मुनिसुव्रतनाथ की काले पाषाण की भव्य प्रतिमा के दर्शन और ग्रह शांति निवारण के लिए श्रद्धालु यहां आकर शांति विधान करवाते हैं।- सुभाष जैन सत्यराज
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