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बेटियों से बात नहीं करता था विनोद, कहता था मुझे तो अपना वारिस चाहिए

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झांसी। दस साल की नेहा, आठ साल की हरकुंवर और आराधना चार साल की है। अगर परिवार वालों की मानें तो विनोद अपनी बेटियों से बात तक नहीं करता था। दादा पूजन और चाचा धनीराम ही इन बच्चियों का लालन पालन कर रहे थे। विनोद को परिवार वालों ने खूब समझाया लेकिन उसे तो बस बेटे की चाहत थी। सबसे एक ही बात कहता था कि उसे वारिस चाहिए। उसे इस बार उम्मीद थी कि बेटे का जन्म होगा लेकिन बेटी के पैदा होने की खबर सुनते ही जहर खाकर जान दे दी। आज चार बेटियों के सिर से बाप का साया उठ गया है।
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मडावरा थाना क्षेत्र के गांव धुरवारा निवासी विनोद के हिस्से में साढ़े सात बीघा जमीन थी। वह इसी जमीन में खेतीबाड़ी कर रहा था। परिवार वालों का कहना है कि जब बड़ी बेटी नेहा पैदा हुई तब तो विनोद खुश था। लेकिन जब बेटे की चाहत में एक एक करके दो बेटियां और हो गईं तो वह परेशान रहने लगा। वह इतना बदल गया कि तीनों बेटियों से बात करना बंद कर दिया। पत्नी कमलेश के साथ भी उसका व्यवहार बदल गया था। जब उसके तीन बेटियां हो गईं तो सभी ने कहा कि अब बेटे की चाहत छोड़कर बेटियों का लालन-पालन अच्छे से करे लेकिन वह बेटे की जिद पर अड़ा रहा। इस बार जब उसकी पत्नी गर्भवती हुई तो सबसे कहना शुरू कर दिया कि उसके यहां बेटा होगा। उसका वारिस आ रहा है। घर वालों और सगे संबंधियों से कहता था कि बेटा होने की बड़ी दावत भी करेंगे। बृहस्पतिवार को जब अस्पताल से पिता ने फोन पर बेटी के जन्म की खबर दी तो वह तनाव में आ गया और जहर खा लिया। विनोद के पिता पूजन का कहना है कि वह चारों बेटियों का लालन-पालन करेंगे। चारों अच्छे स्कूल में पढ़ाएंगे।
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